भास्कर संवाददाता | सीकर राजमेस कमिश्नर ने गुरुवार को वीसी के जरिए मां योजना की समीक्षा की। एसके अस्पताल में क्लेम रिजेक्शन के बढ़ते मामलों पर नाराजगी जताई। कमजोर प्रगति वाले डिपार्टमेंट के एचओडी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए। ताकि व्यवस्था में सुधार किया जा सकें। दरअसल अस्पताल में पहुंचने वाले मरीजों की 24 घंटे में टीआईडी जनरेट नहीं की। इसका नतीजा ये रहा है कि जो क्लेम सब्मिट किए। उनमें 33% रिजेक्ट कर दिए। नियमानुसार मरीज भर्ती होने के 24 घंटे में फाइल सब्मिट होनी थी। लेकिन स्टाफ की लापरवाही के कारण इसमें ज्यादा समय लगा। डिपार्टमेंट में भर्ती मरीज के एडमिशन और डिस्चार्ज के समय लाइव फोटो भिजवाने में भी लापरवाही बरती गई। इसलिए अकेले नवंबर में अस्पताल को 70 लाख रुपए की चपत लग गई। मां स्कीम में कुल 1 करोड़ 90 लाख रुपए के क्लेम सब्मिट किए। लेकिन 70 लाख रुपए से ज्यादा के क्लेम रिजेक्ट हो गए। ^वीसी में मां योजना की समीक्षा की। राजमेस अफसरों ने क्लेम रिजेक्शन को गंभीरता से लिया है। शुक्रवार को मीटिंग बुलाई है। लापरवाही की वजह जानकारी अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाएगी। एमसीएच विंग निरीक्षण में स्टाफ गैर हाजिर मिला था। उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की है। -डॉ. अशोक चौधरी, प्रिंसिपल, एसके मेडिकल कॉलेज एसके मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. अशोक चौधरी ने गुरुवार शाम को एमसीएच विंग का निरीक्षण किया। निरीक्षण में गायनिक ओपीडी से ड्यूटी डॉक्टर गायब मिली। वार्डों में 4 नर्सिंगकर्मी भी नहीं थे। निरीक्षण के दौरान सुपरवाइजर भी गैर हाजिर स्टाफ के संबंध में जानकारी उपलब्ध नहीं करा सका। प्रिंसिपल ने ड्यूटी डॉक्टर, नर्सिंगकर्मी और सुपरवाइजर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है।


