झारखंड लोकसेवा आयोग (जेपीएससी) की द्वितीय सिविल सेवा परीक्षा में हुए नियुक्ति घोटाले में एसीबी और सीबीआई के बाद अब ईडी की भी एंट्री हो गई है। ईडी ने 60 आरोपियों के खिलाफ इंफोर्समेंट केस इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट (इसीआईआर) दर्ज की है। यह कार्रवाई सीबीआई की एफआईआर और चार्जशीट के आधार पर धनशोधन अधिनियम (पीएमएलए) के तहत की गई है। जांच एजेंसी अब इस मामले से जुड़े अधिकारियों, अभ्यर्थियों, परीक्षकों और साक्षात्कार बोर्ड के सदस्यों के खिलाफ वित्तीय लेनदेन और संपत्ति अर्जित करने की जांच करेगी। जांच एजेंसी पता लगाएगी कि घोटाले से जुड़े धन का लेनदेन कैसे हुआ। आरोपियों ने अवैध तरीके से कितनी संपत्ति अर्जित की। कहीं यह मामला संगठित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का हिस्सा तो नहीं है। गौरतलब है कि शुरुआत में इस नियुक्ति घोटाले की एसीबी ने जांच शुरू की थी। जांच लंबी खिंचने पर झारखंड हाईकोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी। सीबीआई रांची की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने 7 जुलाई 2012 को एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू की थी। आरोपियों में 28 परीक्षार्थी, 6 तत्कालीन अधिकारी और 26 परीक्षक ईडी ने जिन लोगों के खिलाफ ईसीआईआर दर्ज की है, उनमें 28 परीक्षार्थी, 6 तत्कालीन अधिकारी और 26 परीक्षक शामिल हैं। इनमें जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष दिलीप कुमार प्रसाद, तत्कालीन सदस्य गोपाल प्रसाद, शांति देवी, राधा गोविंद नागेश, परीक्षा नियंत्रक एलिस ऊषा रानी सिंह, सहायक समन्वय मूल्यांकन अधिकारी अरविंद कुमार सिंह और ग्लोबल इन्फॉर्मेटिक के प्रबंधक धीरज कुमार शामिल हैं। सीबीआई की चार्जशीट में भी गंभीर गड़बड़ियों का हुआ था खुलासा… सीबीआई ने जांच के बाद अक्टूबर 2024 में 60 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। विशेष सीबीआई कोर्ट ने इस चार्जशीट पर संज्ञान भी ले लिया है। इस चार्जशीट में चयन प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर हेराफेरी की पुष्टि की गई है। सीबीआई ने कॉपियों की गुजरात फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (एफएसएल) की रिपोर्ट को भी चार्जशीट के साथ कोर्ट को सौंपा है। जिसमें कॉपियों से छेड़छाड़ करने का दावा किया गया है। इसी बीच अब ईडी ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। कॉपियों में काट-छांटकर अंक बढ़ाए, इंटरव्यू में अयोग्य अभ्यर्थियों को मनमाने नंबर दिए नियुक्ति घोटाले में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए थे। उत्तर पुस्तिकाओं की फॉरेंसिक जांच में पता चला था कि परीक्षा के बाद अयोग्य अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं में दिए गए अंकों को काटकर ज्यादा अंक चढ़ाए गए। परीक्षकों ने इंटरव्यू और लिखित परीक्षा में अयोग्य अभ्यथियों को अधिक अंक दिए। जेपीएससी के तत्कालीन अधिकारियों और परीक्षकों ने एक सुनियोजित साजिश के तहत अयोग्य अभ्यर्थियों को सफल घोषित कर दिया। यह भी पता चला कि कई प्रभावशाली लोगों ने अपने पद और शक्ति का दुरुपयोग कर नियमों को ताक पर रखते हुए अपने रिश्तेदारों को सरकारी पदों पर नियुक्त कराया। इस तरह इस नियुक्ति प्रक्रिया में भारी गड़बड़ी की गई। ये अभ्यर्थी जो अधिकारी बने: डीएसपी राधा प्रेम किशोर, हरिहर सिंह मुंडा, शिवेंद्र, अरविंद कुमार सिंह, विकास कुमार पांडेय, रवि कुमार कुजूर, मुकेश कुमार महतो, राज्य प्रशासनिक सेवा के शिशिर कुमार सिंह, राजीव कुमार सिंह, रामकृष्ण कुमार, प्रमोद राम, मनोज कुमार, विनोद राम, कानू राम, प्रकाश कुमार, हरिशंकर बड़ाईक, रजनीश कुमार, संतोष कुमार चौधरी… शेष पेज 11 पर


