एसआईआर का काम लगभग 80 दिन से चल रहा है। इस दौरान 80 फीसदी से ज्यादा वोटरों को कुछ न कुछ परेशानी झेलनी पड़ी है। मौजूदा स्थिति यह है कि अब वोटर का उत्साह खत्म सा है। वह न तो नोटिस देने के बाद सुनवाई के लिए पहुंच रहा है न नाम कटने के बाद फिर से जुड़वाने। अफसर इसके दो मुख्य कारण बता रहे हैं, पहला-अभी चुनाव नहीं है, दूसरा-वह जागरुक नहीं है। चूंकि एसआईआर के दौरान बड़ी संख्या में नाम कट चुके हैं, इसलिए जनप्रतिनिधि और अफसर दोनों चिंतित हैं। मौखिक तौर पर ज्यादा से ज्यादा नाम जुड़वाने के लिए कहा भी जा चुका है। नो मैपिंग वाले 68 हजार 540 वोटर में से 51 हजार 509 को नोटिस डिलिवर हो चुके हैं। इनमें से सुनवाई के लिए सिर्फ लगभग 20 फीसदी अर्थात 10 हजार 440 पहुंचे हैं। एक दिन पहले इस मुद्दे पर सीईओ व स्थानीय अफसर चिंता जता चुके हैं। इसके बाद ही तीन विधानसभा क्षेत्र के ऐसे 30 वोटरों के मोबाइल नंबर सीईओ के पास भेजे गए जो नोटिस के बाद भी सुनवाई के लिए नहीं आए हैं। अभी कुछ और नंबर भी भेजे जाएंगे। इनसे सीईओ की टीम चर्चा करेगी। इसके बाद संभव है कि सुनवाई पर न आने वाले वोटरों के घर खुद ही स्थानीय अफसर पहुंचे और उनकी सुनवाई करें। यदि ऐसा होता है तो नोटिस के साथ फोटो खींच कर पोर्टल पर डालने की व्यवस्था बदलनी होगी। इस मामले में उप जिला निर्वाचन अधिकारी अनिल बनवारिया ने कहा कि अधिक से अधिक नो मैपिंग वोटरों की सुनवाई के लिए प्रयास जारी हैं। तीन विधानसभा के 30 वोटरों के नाम भेजे हैं। लॉजिकल एरर भी 54 हजार से ज्यादा घट चुकी है। वोटरों के घटते उत्साह घटने के यह 5 प्रमुख बड़े कारण एसआईआर के पहले और बाद के वोटरों के आंकड़े


