भागीरथपुरा में गंदे पानी से गुरुवार को 24वीं मौत हो गई। 78 वर्षीय सुभद्राबाई पति बसंतराव पंवार ने निजी अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। बेटे मनीष पंवार के अनुसार, 27 दिसंबर से सेहत बिगड़नी शुरू हुई थी।
उन्हें उल्टी-दस्त की शिकायत थी। 29 दिसंबर को हालत ज्यादा खराब होने पर निजी अस्पताल ले गए। दो दिन बाद डिस्चार्ज कर दिया गया। 5 जनवरी को फिर दिक्कत आई। दो अस्पतालों ने लौटा दिया। 8 जनवरी की रात बड़ा गणपति के पास के हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। 116 नए मरीजों में 6 डायरिया के- गुरुवार को ओपीडी में आए 116 मरीजों में से 6 डायरिया के पाए गए। सभी की स्थिति सामान्य है। फिलहाल 17 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं। इनमें से 11 मरीज वार्ड में और 6 आईसीयू में भर्ती हैं। सीएस ने कहा-सभी मौतें दूषित जल से नहीं उधर, हाई कोर्ट में मौत के आंकड़ों को लेकर ही सरकारी पक्ष गड़बड़ा गया। गुरुवार को सुनवाई के दौरान जब हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने पूछा कि कितनी मौतें हुईं हैं? इस पर अतिरिक्त महाधिवक्ता ने पहले 21 कहा, फिर पलटकर 15 बता दिया। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला, जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। इस दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा कि सभी मौतें दूषित पानी से नहीं हुईं, कुछ पहले से बीमार थे, फिर भी सरकार ने मानवीयता दिखाते हुए सभी को 2-2 लाख रुपए दिए हैं। मुख्य सचिव ने कहा कि हमने हाई कोर्ट के सभी दिशा-निर्देशों का पालन किया है। सभी का मुफ्त इलाज किया जा रहा है। भागीरथपुरा में अभी भी टैंकर से पानी सप्लाई हो रही है और पाइप लाइन बदली जा रही है। जितने भी लीकेज थे, उन्हें बंद कर दिया है। याची की आपत्ति…-रिपोर्ट की कॉपी नहीं दी सीएस के जवाब पर आपत्ति लेते हुए याचिकाकर्ताओं ने कहा कि सरकार पालन-प्रतिवेदन रिपोर्ट पेश कर चुकी है, लेकिन किसी को उसकी प्रति नहीं दी गई। हाईकोर्ट ने प्रति देने के निर्देश दिए। मंगलवार को फिर सुनवाई होगी। याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट अजय बागड़िया, मनीष यादव, रितेश इनानी ने पैरवी की। शासन की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह भी वीसी से जुड़े।


