भोपाल की आवासीय योजनाओं में देरी और अधूरे विकास को लेकर उपभोक्ताओं की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं। इसी कड़ी में जिला उपभोक्ता आयोग ने एयर सिटी आवासीय योजना से जुड़े एक मामले में भोपाल विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। आयोग ने माना कि वर्षों तक भूखंड का विकास कार्य पूरा नहीं करना और कब्जा नहीं देना उपभोक्ता के अधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन है। आयोग ने इस मामले में कब्जा देने के साथ-साथ मुआवजे और ब्याज सहित राशि लौटाने का भी विकल्प दिया है। क्या है पूरा मामला
एयर सिटी आवासीय योजना से जुड़ा यह मामला वर्ष 2013 से चला आ रहा है। योजना के विज्ञापन से प्रभावित होकर एक दिव्यांग युवती के परिजन ने भविष्य सुरक्षित करने के उद्देश्य से उसके नाम पर आवासीय भूखंड बुक कराया था। 29 जनवरी 2013 को भूखंड का पंजीयन कराया गया और इसके बाद किस्तों में कुल करीब 9.07 लाख रुपए की राशि भोपाल विकास प्राधिकरण को जमा कर दी गई। बीडीए द्वारा भूखंड का आवंटन भी कर दिया गया, लेकिन तय समय-सीमा बीतने के बाद भी न तो योजना का विकास पूरा किया गया और न ही भूखंड का कब्जा या रजिस्ट्री कराई गई। वर्षों तक इंतजार और बार-बार संपर्क के बावजूद स्थिति साफ न होने पर आखिरकार परिजन ने 16 फरवरी 2018 को जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। आयोग की सुनवाई और टिप्पणी
सुनवाई के दौरान आयोग ने माना कि भुगतान लेने के बाद भी वर्षों तक विकास कार्य अधूरा रखना सेवा में गंभीर कमी है। आयोग ने यह भी कहा कि बीडीए यह स्पष्ट नहीं कर पाया कि योजना का विकास कब तक पूरा होगा। बीडीए की ओर से यह दलील दी गई कि शिकायत समय-सीमा के बाहर है, लेकिन आयोग ने इसे खारिज करते हुए कहा कि जब तक उपभोक्ता को भूखंड का कब्जा नहीं दिया जाता, तब तक विवाद लगातार बना रहता है। सभी पक्षों को सुनने के बाद आयोग ने 29 दिसंबर 2025 को फैसला सुनाया। आयोग का आदेश और पैनाल्टी
आयोग ने बीडीए को चार माह के भीतर भूखंड का कब्जा देकर रजिस्ट्री कराने के आदेश दिए हैं। साथ ही सेवा में कमी और मानसिक पीड़ा के लिए 30 हजार रुपए मुआवजा और 5 हजार रुपए वाद व्यय देने का निर्देश दिया गया है। यदि बीडीए तय अवधि में कब्जा देने में असफल रहता है, तो उसे 9.07 लाख रुपए की जमा राशि 18 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटानी होगी।


