अलवर शहर के बगल में बाघों का बसेरा इतना बढ़ चुका है कि अब तो बाघिन के शावक ही सफारी की जिप्सी के आगे आकर बैठ जाते हैं। ऐसा पिछले दो दिनों में दो बार देखा गया। एक जगह शावक पानी पीते मिल गए। यह सब बाला किला के आसपास के जंगल में का नजारा है। यहां पहले भी कई बार ये बाघिन अपने शावकों के साथ नजर आई है। इसके अलावा भी बफर जोन के जंगल में बाघ, बाघिन व शावकों की संख्या में 10 से ज्यादा है। सरिस्का का बफर जोन का जंगल अलवर शहर से लगता हुआ है। पहाड़ों के ऊपर बाला किला है। उसके चारों तरफ जंगल है। इसके नीचे अंधेरी के आसपास के एरिया में बाघिन एसटी 2302 अधिक दिखी है। यहीं पर शावक भी नजर आए हैं। पहले यहां दूसरे टाइगर भी खूब देखे गए हैं। टाइगर एसटी 18 भी यहां आसपास दिख जाता है। इसके अलावा टाइग्रेस एसटी 19 व उसके शावक भी पहले देखे गए थे। करीब दो साल पहले तो टाइग्रेस व उसके शावक तो भूरासिद्ध मंदिर परिसर तक आए हैं। सरिस्का के जंगल में 50 टाइगर सरिस्का के जंगल में 50 से अधिक टाइगर हैं। बफर जोन में भी 10 से अधिक टाइगर हैं। इसी कारण अब साइटिंग खूब होती है। टहला की तरफ भी टाइग्रेस एसटी 30 अपने शावकों के साथ खूब नजर आई है। जिसके कारण टहला की तरफ भी टूरिस्ट की संख्या बढ़ी है। वहीं सदर गेट की तरफ टाइग्रेस एसटी 9, टाइगर एसटी 21 की खूब साइटिंग होती है। इस तरह जहां-जहां सफारी के रूट हैं। वहां टाइगर खूब दिखते हैं। आगे नए रूट आने पर सरिस्का में टूरिस्ट की संख्या में इजाफा होने की संभावना है।


