इंदौर के भगीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद डिंडौरी नगर परिषद क्षेत्र में पानी की गुणवत्ता जांचने का अभियान शुरू हो गया है। पार्षद और कर्मचारी घर-घर जाकर पानी के नमूने एकत्र कर रहे हैं। यह जल सुनवाई 12 जनवरी से शुरू हुई है और अगले छह महीने तक जारी रहने की बात कही जा रही है। नगर परिषद के सीएमओ अमित तिवारी ने बताया कि 12 जनवरी से नगरीय क्षेत्र के 15 वार्डों में तीन टीमें प्रतिदिन पांच घरों से पानी के नमूने ले रही हैं। इन नमूनों का परीक्षण घर के मालिक के सामने ही किया जाता है और उन्हें पानी का पीएच स्तर बताया जाता है। इस कार्य में प्रशिक्षित स्वयं सहायता समूह की महिलाएं टीमों के साथ लगी हुई हैं। यहां की गई जांच शुक्रवार को वार्ड नंबर 9 की पार्षद स्मिता बर्मन और उपाध्यक्ष सारिका नायक ने टीम के साथ वार्ड नंबर 10 में संतोषी पटेल और वार्ड नंबर 9 में चैना बाई रजक के घर में पानी की जांच देखी। घरों से बोतल में पानी मंगाया गया। स्वयं सहायता समूह की सदस्य सरिता, रेणुका नंदा और रोशनी धार्वे ने परखनली में पानी डालकर क्लोराइड, फ्लोराइड, सुगंध, कठोरता और ई-कोलाई जैसे मापदंडों का परीक्षण किया। जांच में पानी का पीएच स्तर 8.5 पाया गया। समूह के सदस्यों ने बताया कि यह पानी पीने योग्य है। इस दौरान यशवंत मसराम, आशीष कोरी, श्वेता तिवारी, शिव प्रसाद, घनश्याम वनवासी और कृष्णा मालवीय सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।


