सरकार ने माना दूषित पानी से हुई 15 मौतें:इनमें 5 माह का बच्चा भी; पहले कहा था- इंदौर में सिर्फ 6 की जान गई

भागीरथपुरा में दूषित पानी से अब तक 24 लोगों की मौत हुई है। इनमें 21 की डेथ ऑडिट रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट में शासन ने माना कि इनमें से 15 लोगों की मौत दूषित पानी के कारण ही हुई है। इनमें 5 माह का बच्चा भी शामिल है। इसके अलावा दो लोगों की मौतें तो यह एपिडेमिक शुरू होने के पहले ही हो चुकी थी, जबकि चार लोगों की मौत अन्य कारणों से हुई है। दरअसल, इस मामले में पहले प्रशासन की ओर से चार लोगों के दूषित पानी से मरने की पुष्टि की गई थी। इसके बाद 6 लोगों की मौत बताई गई। इस बीच मौतों का आंकड़ा बढ़कर 24 तक पहुंच गया। चूंकि मामले में हाई कोर्ट ने 15 जनवरी को विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे, इस पर 13 जनवरी को डेथ ऑडिट रिपोर्ट तैयार की गई। इसमें तब 21 लोगों की मौतों का ऑडिट किया गया। इन 15 लोगों की बताई दूषित पानी से मौत
उर्मिला (60), ताराबाई (65), नंदलाल (70), हीरालाल (65), अरविंद निकर (43), अव्यान (5 माह), मंजूला (65), गीताबाई (64), उमा कोरी (31), गोमती, श्रावण (80), सीमा (40), जीवनलाल (80), रामकली (47) और हरकुंवर बाई (81)। इन चारों की मौतें दूषित पानी से नहीं इन दोनों की मौत को लेकर अजीब स्थिति
कमला (60) को पांच दिनों से उल्टी-दस्त होने के साथ घबराहट, पेट दर्द, उल्टियां हो रही थीं। उसे 8 जनवरी को एडमिट किया गया था और 9 को मौत हो गई थी। उसे ब्लड प्रेशर सहित अन्य तकलीफें भी थीं। मौत का कारण कार्डियक अरेस्ट है। सुनीता पति सतीश (49) को 7 जनवरी को एडमिट किया गया था। उन्हें उल्टियां, सांस लेने में परेशानी, हीमोग्लोबिन कम, पहले से ही रिनेल फेल्युअर जैसी तकलीफें थीं। उन्हें भी कार्डियक अरेस्ट हुआ था और छह बार सीपीआर दिया गया था। 10 जनवरी को मौत हो गई थी। ये दोनों मौतों को लेकर संशय भी है। इन पांच डॉक्टरों की टीम ने तैयार की रिपोर्ट
डेथ ऑडिट रिपोर्ट के लिए पांच डॉक्टरों की कमेटी बनाई गई थी। इनमें डॉ. संजय दुबे, डॉ. अखिलेश प्रतापसिंह तोमर, डॉ. सिरोज सिरोही, डॉ. धर्मेंद्र चौबे और डॉ. सुनील सोनी हैं। भागीरथपुरा दूषित पानी कांड में गुरुवार को जारी बुलेटिन के अनुसार एडमिट मरीजों की संख्या घटकर 16 रह गई है। इनमें से 10 वार्ड और 6 आईसीयू में हैं। 3 मरीज लंबे समय से वेंटिलेटर पर हैं। गुरुवार को डायरिया के 6 मरीज मिले, जिनका क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर परीक्षण हुआ। उन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया और अस्पताल रेफर करने की जरूरत नहीं पड़ी। अब तक 441 मरीज एडमिट हुए, जिनमें से 424 डिस्चार्ज हो चुके हैं। प्रभावित क्षेत्र में ‘अभियान स्वास्थ्यवर्धन’ भी जारी रहा। 48 टीमों ने 715 घरों का सर्वे कर 2087 रहवासियों की विभिन्न जांचें की। इसमें ब्लड प्रेशर के 133 और डायबिटीज के 64 मरीज थे। उन्हें हेल्थ कार्ड देकर आगे की जांच के लिए रेफर किया गया। रेड क्रॉस सोसाइटी पर सवाल
इस मामले में 18 से ज्यादा मृतकों के परिवारों को 2-2 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी जा चुकी है। इसे लेकर कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता और एडवोकेट प्रमोद कुमार द्विवेदी ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि रेड क्रॉस सोसाइटी शासन नहीं है बल्कि दानदाताओं के माध्यम से चलने वाली एक सोसाइटी है जो त्वरित रूप से मदद करती है। वह भी ऐसे समय में जब शासन से मिलने वाली अनुमति में देरी होती है।
इंदौर में अब चलन हो गया है कि हर मामलों में रेड क्रॉस सोसाइटी मदद करती है। प्रमोद कुमार का आरोप है कि प्रशासन द्वारा इसका दुरुपयोग किया जा रहा है। 2016 में डेढ़ साल की एक बालिका के साथ रेप हुआ था और एक अन्य बालिका की रेप के बाद हत्या कर दी गई थी। इन दोनों मामलों में अधिकतम 50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी गई थी। भागीरथपुरा मामले में रेड क्रॉस सोसाइटी की ओर से दिए गए हैं जबकि शासन को देना चाहिए। शासन को यह राशि अलग से देना चाहिए। रेड क्रॉस सोसाइटी की ऑडिट कराने की मांग की है कि इसमें किन लोगों का पैसा आ रहा है। सोसाइटी द्वारा अधिकतम 80 हजार रुपए की राशि देने का प्रावधान है। ये खबरें भी पढ़ें… इंदौर में बदबूदार, झाग और कीड़े वाले पानी की सप्लाई इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौतों का सिलसिला जारी है। अब तक 23 मौत हो चुकी है। अभी 39 मरीज एडमिट हैं, जिनमें से 10 आईसीयू में हैं। इनमें भी तीन वेंटिलेटर पर हैं। लगातार हो रही मौतों को लेकर अभी भी क्षेत्र में दहशत है। अब यहां टैंकरों से पानी दिया जा रहा है।पढे़ं पूरी खबर सबसे पहले 2 बच्चों में मिले थे हैजा जैसे सिम्टम्स इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से 17 लोगों की मौत हो गई है। आईसीयू में 15 मरीज एडमिट हैं, जिनमें से 2 की हालत क्रिटिकल बताई जा रही है। कुल एडमिट मरीजों की संख्या 110 है, जबकि एक हफ्ते पहले एडमिट मरीजों की संख्या 398 थी। इस बीच एक चौंकाने वाली बात सामने आई है। अस्पताल के सूत्रों ने बताया है कि समय रहते बच्चों में हैजा जैसे सिम्टम्स पता चल गए, नहीं तो स्थिति कुछ और हो सकती थी।पूरी खबर पढ़ें

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