सरगुजा में जल-जंगल-जमीन बचाने शुरू हुआ संयुक्त आंदोलन:अंबिकापुर में रैली एवं आमसभा, खनन परियोजनाओं में आदिवासी हितों की अनदेखी का आरोप

जल-जंगल-जमीन और पर्यावरण का विनाश कर जबरन खोली जा रही खनन परियोजनाओं के खिलाफ़ अंबिकापुर में रैली निकाली गई और आमसभा का आयोजन किया गया। आमसभा में वक्ताओं ने कहा कि पांचवीं अनुसूची लागू होने के बाद भी ग्राम सभाओं की अनदेखी की जा रही है। खनन परियोजनाओं के लिए जबरदस्ती जमीनें छीनी जा रही हैं एवं आदिवासियों का हक मारा जा रहा है। आमसभा में हसदेव अरंय बचाओ संघर्ष समिति की सुनीता पोर्ते ने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा ने जुलाई 2022 में सर्वसम्मति से हसदेव की सभी खदानें निरस्त करने का संकल्प पारित किया था। बावजूद इसके छत्तीसगढ़ सरकार ने नई केते एक्सटेंशन खनन परियोजना के लिए अनुशंसा जारी कर दी है। हसदेव की परसा कोल ब्लॉक में ग्रामसभा के फर्जी प्रस्ताव बनाकर वन स्वीकृति हासिल की गई थी। पुलिस बल लगाकर गैरकानूनी रूप से पेड़ों की कटाई जारी है। पांचवीं अनुसूची का हो पालन-भानू
अनुसूचित जनजाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष भानुप्रताप सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ पांचवीं अनुसूची राज्य है, यहाँ वन अधिकार कानून और पेसा कानून लागू हैं और उनका अक्षरशः पालन होना चाहिए। ग्रामसभा की सहमति के बिना किसी भी प्रकार का भूमि अधिग्रहण स्वीकार नहीं किया जाएगा। वन संपदा की छत्तीसगढ़ में लूट-आलोक शुक्ला
छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन से आलोक शुक्ला ने कहा कि सरगुजा सहित सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ में पांचवी अनुसूचित क्षेत्रों में ग्रामसभाओं की सहमति की अनदेखी की जा रही है। खनन परियोजनाओं के लिए जंगल-जमीन के अधिग्रहण और खनन परियोजनाओं के लिए वन भूमि के डायवर्सन की जबरन कार्रवाई की जा रही है। आलोक शुक्ला ने कहा कि राज्य सरकार जनता के बजाय चंद कॉर्पोरेट घरानों के मुनाफे और लूट के लिए काम कर रही है। गिरीश भाई ने प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटन के लिए प्रसिद्ध मैनपाट क्षेत्र में बाक्साइट की नई खदानों की अनुमति दिए जाने पर गहरी चिंता व्यक्त की गई। वक्ताओं ने कहा कि इससे न केवल मैनपाट का अस्तित्व खतरे में पड़ेगा, बल्कि अंबिकापुर शहर और आसपास के इलाकों में भी पानी का गंभीर संकट पैदा होगा। आमसभा को मदन नगर के बाबूलाल, ग्राम सुरसा के विजय, छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के रमाकांत बंजारे, फतेहपुर के मुनेश्वर सिंह पोर्ते, सांभर पोया सहित अन्य वक्ताओं ने संबोधित किया। रैली के बाद सौंपा ज्ञापन
ग्रामीणों ने बीटीआई मैदान से रैली निकाली और कलेक्टर कार्यालय तक पहुंचे। लंबी प्रतीक्षा के बाद कलेक्टर ओर से एसडीएम को ज्ञापन लेने भेजा गया। कड़े विरोध और नारेबाजी के बाद ग्रामीणों ने एसडीएम को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में खनन प्रभावित क्षेत्रों के लोग, संगठनों के पदाधिकारी एवं पर्यावरण प्रेमी शामिल हुए।

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