अस्पताल में नाबालिग की मौत, इलाज में लापरवाही का आरोप:खरगोन में डेढ़ घंटे तक हंगामा; डॉक्टर बोले- लिवर डैमेज हुआ

खरगोन जिला अस्पताल के मेडिकल वार्ड में इलाज के दौरान 17 वर्षीय नाबालिग की मौत हो गई। इसके बाद परिजनों ने लगभग एक घंटे तक हंगामा किया और अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया। सूचना मिलने पर जैतापुर थाना प्रभारी सुदर्शन कलोसिया पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पिपरीपाला निवासी अरुण पिता पतलिया डाबर को सुबह अस्पताल के मेडिकल वॉर्ड में भर्ती कराया गया था। शुक्रवार 4 बजे इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। उसके बाद एक घंटा हंगामा की स्थिति बनी। भगवानपुरा विधायक केदार डाबर भी घटना स्थल पर पहुंचे। विधायक और पुलिस ने परिजनों को जांच और इलाज के दौरान दी गई दवाइयों की जांच का आश्वासन दिया, जिसके बाद परिजन शांत हुए। हालांकि, उन्होंने नाबालिग का पोस्टमॉर्टम कराने से इनकार कर दिया। मृतक के भाई ललित ने आरोप लगाया कि इलाज में लापरवाही बरती गई। उसने बताया कि अरुण ने रात में खेत में सिंचाई की थी, जिसके बाद सुबह उसका शरीर अकड़ गया था। उसे अस्पताल लाया गया, जहां दोपहर तक चार बोतलें चढ़ाई गईं। इसके बाद वह खाना-पीना और चलने-फिरने लगा था, यानी ठीक हो गया था। ललित के अनुसार, एक इंजेक्शन लगाने के बाद उसकी मौत हो गई। परिजनों ने यह भी कहा कि अस्पताल ने इलाज के बजाय इंदौर रेफर करने को कहा था। जिला अस्पताल के डॉ. पवन निगवाल ने लापरवाही के आरोपों से इनकार किया। उन्होंने बताया कि मरीज की हालत गंभीर थी। लिवर इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट में अत्यधिक लिवर डैमेज पाया गया था। ब्लड में इन्फेक्शन, शुगर और ब्लड प्रेशर भी ज्यादा था। डॉ. निगवाल के अनुसार, प्रथम दृष्टया नाबालिग की मौत अत्यधिक शराब सेवन और माइनर हार्ट अटैक से हुई है।

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