महाकाल लोक में गूंजा ‘जय काल महाकाल’:गायिका सोना महापात्रा ने दी प्रस्तुति; शिवभक्ति में डूबा महाकाल महोत्सव का तीसरा दिन

उज्जैन में श्री महाकाल महोत्सव का तीसरा दिन शुक्रवार को शिवभक्ति, लोक-संस्कृति और समकालीन संगीत के रंग में डूबा रहा। मुक्त आकाशी मंच पर आयोजित सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत सुप्रसिद्ध पार्श्व गायिका सोना महापात्रा की प्रस्तुति “जय काल महाकाल” से हुई। इस दौरान पूरा महाकाल लोक जयघोष से गूंज उठा। यह आयोजन वीर भारत न्यास और महाकाल मंदिर प्रबंध समिति द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था। इसमें भक्ति, शास्त्रीय और लोक-संगीत का अद्भुत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान गणेश की वंदना से हुआ, जिसके बाद भगवान शिव को समर्पित एक विशेष शिव वंदना प्रस्तुत की गई। चार स्वरों पर आधारित इस प्रस्तुति ने अपनी सादगी और आध्यात्मिक गहराई से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। सोना महापात्रा ने इसके बाद लोकप्रिय गीत “आजा ओ आजा” प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण राजस्थानी लोकगीत रहा, जो विवाह परंपरा से संबंधित है और संत मीरा बाई की रचना माना जाता है। इस गीत ने मंच पर लोक-संस्कृति की छटा बिखेर दी। महापात्रा की टीम के कलाकार साहिल सोलंकी ने “लगी तेरे संग प्रीत मेरे शंकरा” गीत से दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। पूरी सांस्कृतिक संध्या के दौरान महाकाल लोक श्रद्धालुओं, संगीत प्रेमियों और पर्यटकों से खचाखच भरा रहा। कार्यक्रम से पहले कलेक्टर रौशन कुमार सिंह, प्रशासक प्रथम कौशिक और नरेश शर्मा सहित अन्य अधिकारियों ने सोना महापात्रा का सम्मान किया। वीर भारत न्यास के सचिव श्रीराम तिवारी ने बताया कि महोत्सव के तीसरे दिन ‘कला यात्रा’ का भी भव्य आयोजन किया गया। इस यात्रा में उज्जैन की मयूरी डोड और उनके दल ने आकर्षक ‘मटकी लोकनृत्य’ प्रस्तुत किया। यह यात्रा शास्त्री नगर से शुरू होकर नीलगंगा चौराहा और हाट बाजार होते हुए महाकाल लोक पर समाप्त हुई।

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