लैब में हो गई थी गोमांस की पुष्टि:भोपाल मेयर-कमिश्नर पुलिस जांच का हवाला देती रहीं; पीले चावल पुलिस के पास पहुंचे कांग्रेसी

भोपाल के आधुनिक स्लॉटर हाउस में मिले गोमांस मामले में नगर निगम के जिम्मेदारों की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। मेयर मालती राय और कमिश्नर संस्कृति जैन 265 क्विंटल मांस में गोमांस की पुष्टि को लेकर पुलिस जांच का हवाला देती रहीं, लेकिन 8 जनवरी को हुई एफआईआर में ही पुलिस ने गोमांस की पुष्टि कर दी थी। दूसरी ओर, निगम की तरफ से अब तक कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई। ऐसे में जिम्मेदार भी जांच के दायरे में आ रहे हैं। काफी दबाव आने के बाद वेटनरी डॉक्टर बेनीप्रसाद गौर समेत 9 कर्मचारियों को सस्पेंड किया गया है। वहीं, 3 कर्मचारियों को नोटिस थमाए गए हैं। एक अन्य कार्रवाई में स्लॉटर हाउस को सील किया गया है। निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने जब आसंदी से जांच कमेटी बनाने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का आदेश दिया, तब ताबड़तोड़ ये कार्रवाई हुईं। दैनिक भास्कर के हाथ पुलिस एफआईआर की वो कॉपी लगी है, जिसमें साफ लिखा है कि मांस में गोमांस था। सबसे पहले जानिए पुलिस की सिलसिलेवार कार्रवाई कंटेनर को रोककर जांच, पैकेट में मिला था मांस
जहांगीराबाद थाना प्रभारी मान सिंह चौधरी ने 24 दिसंबर को एक एफआईआर दर्ज की। इसमें 7 दिन पहले, 17 दिसंबर को कंटेनर नंबर यूपी 15 जेटी 4286 में मांस मिलने का हवाला दिया। 18 दिसंबर को वेटनरी अस्पताल जहांगीराबाद में कंटेनर में भरे 265 क्विंटल (26.5 टन) मांस में से वेटनरी डॉक्टर की टीम ने अलग-अलग 5 डिब्बों में सैंपल लिए। बाकी मांस कंटेनर के ड्राइवर शोएब पिता कमालउद्‌द्दीन को ही सुपुर्दगी में दे दिया गया। मथुरा की लैब में भेजे गए सैंपल
पुलिस ने जो सैंपल कंटेनर में मिले मांस के लिए थे, उन्हें पुलिस ने जांच के लिए फोरेंसिक लेबोरेटरी मथुरा को भेजे। संदिग्ध मांस के सैंपल की जांच रिपोर्ट भी मिल गई। जिसमें मांस में गोमांस (SAMPLE BELONG TO COW OR IT’S PROGENY) का होना सामने आया। प्रदर्शन, पुलिस की कार्रवाई, फिर जागा निगम
गोमांस की पुष्टि होने के बाद हिंदूवादी संगठनों ने अरेरा हिल्स थाने के सामने प्रदर्शन किया। इसके बाद पुलिस ने जिंसी स्थित आधुनिक स्लॉटर हाउस का संचालन करने वाली लाइव स्टाक फूड प्रोसेसर प्राइवेट लिमिटेड में पहुंचकर दस्तावेज जब्त किए। स्लॉटर हाउस का संचालक असलम चमड़ा कुरैशी का होना पाया गया है। इसके बाद निगम से स्लॉटर हाउस से जुड़ी सारी जानकारी पुलिस ने ली। ड्राइवर शोएब पिता कमालउ‌द्दीन निवासी थाना खरखोदा मुस्कान पब्लिक स्कूल के पास इकबाल नगर हुमायूं नगर मेरठ (यूपी) से पूछताछ की गई। जांच के बाद पुलिस ने संचालक असलम चकड़ा, ड्राइवर शोएब व अन्य के विरुद्ध मप्र गोवंश वध प्रतिषेध अधिनियम 2004 की धारा 4, 5 और 9, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धार 61 (2) के तहत केस दर्ज किया। पुलिस ने माना कि गोवंश का वध कर उसके मांस को षड्यंत्रपूर्वक परिवहन किया जा रहा था। पढ़िए पुलिस ने क्या कार्रवाई की… जिस वेटनरी डॉक्टर को सस्पेंड किया, उसी ने बताया था- भैंसें कटी
इस पूरे मामले में वेटनरी डॉ. गौर को सस्पेंड किया गया है। इसी डॉक्टर ने 17 दिसंबर 2025 को जारी पत्र में प्रमाणित किया था कि स्लॉटर हाउस में बीते करीब दो सप्ताह में 15 वर्ष से अधिक उम्र की 85 भैंसों का वध किया गया। इसके बाद मांस को फ्रोजन मीट के रूप में पैक कर मुंबई भेजने की अनुमति दी गई। हैरत की बात है कि इसी खेप से पुलिस ने जो सैंपल लिए, उनमें गोमांस की पुष्टि हुई। इससे यह स्पष्ट हुआ कि स्लॉटर हाउस में या तो गायों का वध हुआ या फिर नगर निगम स्तर पर मांस के प्रकार को लेकर गलत प्रमाणन किया गया। मेयर चुप्पी साधे रहीं, कहा- पुलिस जांच कर रही
8 जनवरी को ही स्लॉटर हाउस से निकले मांस में गोमांस की पुष्टि पुलिस कर चुकी थी, लेकिन मेयर राय इस मामले में चुप्पी साधे रही। 9 जनवरी को जब मेयर से सवाल किया गया कि स्लॉटर हाउस मामले में निगम क्या कार्रवाई कर रहा? इस पर मेयर ने जवाब दिया कि पुलिस कार्रवाई करेगी। दूसरी ओर, एक्सपर्ट का कहना है कि इस पूरे मामले में नगर निगम और स्लॉटर हाउस संचालक के बीच एग्रीमेंट का उल्लंघन हुआ। निगम ने गोवध के लिए तो 20 साल के लिए एग्रीमेंट नहीं किया था। अवैध तरीके से ही गोवध किया जा रहा होगा, लेकिन नगर निगम ने अब तक स्लॉटर हाउस को लेकर थाने में कोई केस दर्ज नहीं कराया। जो एक केस दर्ज हुआ है, वह पुलिस ने ही हिंदूवादी संगठनों के विरोध प्रदर्शन के बाद किया था। मामले में कमिश्नर जैन को निगम की तरफ से भी केस दर्ज कराना चाहिए था। स्लॉटर हाउस सील, 10 कर्मचारी सस्पेंड, आगे कुछ नहीं
इस मामले में अब निगम की कार्रवाई की बात करें तो यह स्लॉटर हाउस को सील करने और डॉक्टर समेत 10 कर्मचारियों को सस्पेंड करने से अलावा कुछ नहीं हुआ। 13 जनवरी को नगर निगम परिषद की बैठक में हंगामे को देखते हुए संभागायुक्त संजीव सिंह के जरिए वेटनरी डॉक्टर गौर को सस्पेंड कर दिया गया। वहीं, कांग्रेस और बीजेपी पार्षदों के हंगामे के बाद निगम अध्यक्ष सूर्यवंशी ने आसंदी से ही उच्च स्तरीय कमेटी बनाने के आदेश दिए। वहीं, एमआईसी मेंबर रविंद्र यति की मांग पर स्लॉटर हाउस के 11 कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है। इनमें से 8 कर्मचारी- वसीम खान, सलीम खां, राजा खां, शेख यूसुफ, वहीद खान, मोहम्मद फैयाज खान, ईसा मोहम्मद और अब्दुल रहमान को सस्पेंड किया गया। वहीं, यूसुफ खान, अब्दुल हकीम और मोहम्मद रफीक को नोटिस थमाए गए। स्लॉटर हाउस हमेशा के लिए बंद, मीट दुकानों पर सख्ती
निगम अध्यक्ष सूर्यवंशी ने आसंदी से ही स्लॉटर हाउस को हमेशा के लिए बंद करने के आदेश दिए। ऐसे में नगर निगम ने अब मीट दुकानों पर सख्ती करना शुरू किया है। पुराने शहर में जिन जगहों पर मीट दुकानें हैं, उनमें अवैध स्लॉटिंग पर रोक लगाई जा रही है। पूरी एमआईसी-मेयर को इस्तीफा दे देना चाहिए-विपक्ष
नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने कहा कि एमआईसी मेंबर ‘शहर सरकार’ के मंत्री हैं। मंत्रियों ने कैसे स्लॉटर हाउस को चालू करने के आदेश दे दिए। कोर्ट में मैंने खुद स्टे लिया था, लेकिन एमआईसी ने मीटिंग में इसे शुरू करने की सहमति दे दी। ऐसे में एमआईसी और मेयर को इस्तीफा दे देना चाहिए। यह धार्मिक आस्था से भी खिलवाड़ है। पुलिस कमिश्नर ऑफिस पहुंचे कांग्रेसी
शुक्रवार को कांग्रेस प्रदेश महामंत्री अमित शर्मा समेत कांग्रेसी पुलिस कमिश्नर ऑफिस में पीले चावल लेकर पहुंची। शर्मा ने कहा कि यदि जिम्मेदारों पर एफआईआर नहीं हुई तो कांग्रेस सड़क पर उतरकर बड़ा प्रदर्शन करेगा। उन्होंने कहा कि निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी को भी प्रस्ताव के दौरान आगे आकर बात करनी थी। स्लॉटर हाउस का प्रस्ताव क्यों पास किया गया? ऊपर से लेकर नीचे तक कई लोग जिम्मेदार हैं। इधर, भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने भी गोवंश कटने पर नाराजगी जताते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई किए जाने की बात कही है। वहीं, महापौर के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने की मांग की। इस खबर पर आप अपनी राय दे सकते हैं… इससे जुड़ी ये खबरें भी पढ़िए… 1. स्लॉटर हाउस का मकसद-शर्तें क्या? हर कड़ी की पड़ताल:100 करोड़ की सरकारी जमीन पर बनाया भोपाल में गोमांस मिलने के मामले में अब आधुनिक स्लॉटर हाउस से जुड़ी पूरी फाइल की गहन जांच की तैयारी है। नगर निगम के उच्च स्तर पर निर्णय लिया गया है कि टेंडर की शर्तें तय होने से लेकर टेंडर आवंटन और अंत में कमिश्नर के हस्ताक्षर तक की हर कड़ी की पड़ताल होगी। पढ़ें पूरी खबर… 2. जहां गोमांस मिला… उसे नामंजूर कर चुके गौर और शर्मा, प्रशासक पर फोड़ा ठीकरा भोपाल के आधुनिक स्लॉटर हाउस में गोमांस मिलने के बाद नगर निगम की मेयर इन काउंसिल (एमआईसी) ने पूरा ठीकरा प्रशासक, वेटनरी डॉक्टर और 11 कर्मचारियों पर फोड़ा है। वेटनरी डॉक्टर, 8 कर्मचारियों को सस्पेंड किया जा चुका है, जबकि 3 कर्मचारियों को नोटिस दिए गए। पढ़ें पूरी खबर…

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