मदान मार्केट में 11 लोगों की मौत पर जिला मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं पुलिस जवाबदेह समिति, अब डीसी कराएंगे जांच

भास्कर एक्सक्लू​सिव पिछले साल मई में सिटी कोतवाली पुलिस थाने के सामने पांच मंजिला मदान मार्केट के बेसमेंट में ब्लास्ट से 11 लोगों की मौत पर जिला मजिस्ट्रेट की ओर से दी गई रिपोर्ट पर राज्य स्तरीय पुलिस जवाबदेह समिति ने असंतोष जताते हुए सवाल खड़े किए हैं। अब संभागीय आयुक्त उच्च अधिकारियों से दुबारा जांच कराएंगे। 7 मई, 25 को सिटी कोतवाली पुलिस थाने के सामने मदान मार्केट के बेसमेंट में गैस सिलेंडर लीक होने से ब्लास्ट हुआ और दुकानों की पट्टियां गिर गईं। इससे वहां मौजूद लोग मलबे में दब गए और 11 लोगों की मौत हो गई थी। राज्य स्तरीय पुलिस जवाबदेह समिति ने मामले में जिला मजिस्ट्रेट से रिपोर्ट मांगी थी। जिला मजिस्ट्रेट की ओर से नगर निगम आयुक्त और जिला एसपी से रिपोर्ट लेकर समिति को भेजी गई। राज्य स्तरीय पुलिस जवाबदेह समिति ने रिपोर्ट पर असंतोष जताते हुए सवाल खड़े कर दिए और अपनी टिप्पणी में प्रशासन की संवेदनहीनता और लापरवाही बताया। यह भी कहा गया कि निगम आयुक्त और एसपी की ओर से जिला मजिस्ट्रेट को दी गई रिपोर्ट में अंकित तथ्यों को ही दोहराकर समिति को भेज दी गई। घटना में मदान मार्केट के मालिक की लापरवाही एवं संबंधित प्रशासनिक, पुलिस अधिकारियों की अपने कर्तव्य के प्रति उदासीनता के कारण 11 निर्दोष लोगों की जान गई। समिति के अध्यक्ष एचआर कुड़ी की ओर से बीकानेर संभागीय आयुक्त को निर्देश दिए गए हैं कि वह अपने स्तर पर उच्च अधिकारियों की विशेष समिति का गठन करें और घटना की विस्तृत जांच कराकर रिपोर्ट पेश करें। जांच में समिति की ओर से खड़े किए सवालों को भी शामिल किया जाएगा। गौरतलब है कि परिवादी चुन्नीलाल सोनी की ओर से राज्य स्तरीय पुलिस जवाबदेह समिति को परिवाद पेश किया गया था। डीसी ने कमेटी गठित की : संभागीय आयुक्त ने मदान मार्केट में विस्फोट से तीन मंजिल ढहने और 11 लोगों की मौत तथा घायलों की मामले की विस्तृत जांच करने के लिए कमेटी गठित कर दी है। कमेटी में नगर निगम आयुक्त, अतिरिक्त संभागीय आयुक्त, अतिरिक्त जिला कलेक्टर शहर और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर को शामिल किया गया है। कमेटी को विस्तृत जांच कर 15 दिन में अपनी स्पष्ट टिप्पणी सहित रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा गया है। हादसे में इनकी हुई थी मौत : बंगला नगर में मुस्तफा मस्जिद चूना भट्टा के पास निवासी असलम अली (36), पश्चिम बंगाल हुगली के कुमिरमोरा निवासी सलमान उर्फ शेख बक्कीउल्ला (37), चोपड़ा बारी में बद्री भैरूं मंदिर के पास निवासी किशन सोनी (23), देशनोक निवासी किशन सोनी (21), पूगल रोड बंगला नगर निवासी रामस्वरूप सोनी (22), कोलायत में झझू निवासी लालचंद सोनी (25), पश्चिम बंगाल में राधाकिशनदासपुर निवासी असलम मलिक (30), कसाइयों की बारी के अंदर खटीकों का मोहल्ला निवासी शेख अयान अंसारी (16), बागड़ी मोहल्ला निवासी सचिन सोनी (22), रामपुरा बस्ती में गली नंबर 18 निवासी सुशील कुमार सोनी (62), बड़ा बाजार में उस्तों का मोहल्ला निवासी समीर(18)। 1. मदान मार्केट में किसी भी तरह का अग्निशमन उपकरण नहीं होना और फायर एनओसी हासिल किए बिना मार्केट का संचालन करना, स्पष्टतया अधिकारियों की अनदेखी कर्तव्य के प्रति उदासीनता और लापरवाही बताता है। क्या जिला मजिस्ट्रेट ने ऐसे लापरवाह अधिकारियों के विरूद्व कोई कार्यवाही की है? 2. परिवादी का आरोप था कि मदान मार्केट ऐसी जगह बनाया गया जहां व्यवसायिक गतिविधियां नहीं की जा सकती थी। पार्किंग की व्यवस्था ही नहीं थी। क्या पुलिस ने अपनी जांच में उन जिम्मेदार पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों को भी आरोपी बनाया जिन्होंने अवैधानिक मार्केट को देखकर भी अनदेखा किया और कोई कार्यवाही नहीं की? एसपी को निर्देश दिए कि ऐसे अधिकारियों के खिलाफ भी जांच करें। सात मई को सुबह करीब 10.30 बजे सिटी कोतवाली पुलिस थाने के सामने पांच मंजिला मदान मार्केट में गैस सिलेंडर में ब्लॉस्ट से बिल्डिंग ढही और उसमें दबने से 11 लोगों की मौत हो गई थी। छह लोग घायल भी हुए। पुलिस ने इसकी जांच की और 11 लोगों की मौत का एकमात्र जिम्मेदार बिल्डिंग मालिक व्यास कॉलोनी निवासी राजकुमार मदान को मानकर कोर्ट में चालान पेश कर दिया था। 3. परिवादी का आरोप है कि उसने 21 अगस्त, 24 को ही कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त, संभागीय आयुक्त को अवैधानिक मार्केट की जानकारी देते हुए कार्यवाही के लिए कहा था। क्या पुलिस ने अपनी जांच में निगम के अधिकारियों की लापरवाही और कर्तव्य के प्रति उदासीनता के संबंध में कोई जांच की? 4. जिला कलेक्टर ने संपर्क पोर्टल पर परिवादी की शिकायत डालकर कार्यवाही के लिए कहा। क्या घटना की जांच में लापरवाह अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की गई? 5. जिला मजिस्ट्रेट ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि मदान मार्केट जैसी घटनाओं को रोकने के लिए नगर निगम ने 100 से ज्यादा व्यक्तियों को नोटिस जारी किए हैं। खेदजनक है कि निगम ने घटना होने के बाद अवैध निर्माण और अग्निशमन उपकरण लगाने के नोटिस जारी किए। जिला मजिस्ट्रेट की ओर से क्या इस बिन्दु पर जांच की गई कि घटना से पूर्व में ही नोटिस क्यों नहीं जारी किए गए? पुलिस ने हादसे का जिम्मेदार सिर्फ बिल्डिंग मालिक को माना था जिला मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट पर असंतोष जताते हुए सवाल खड़े किए, संवेदनहीनता और लापरवाही बताया

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