भरतपुर| केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार व्यवस्था को नई दिशा देते हुए विकसित भारत–रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटी अधिनियम, 2025 (वीबी-जी रामजी) लागू कर दिया है। यह कानून ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और टिकाऊ बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। जिसमें खासकर सालाना रोजगार गारंटी 100 से बढ़ाकर 125 दिन, फसल बुवाई और कटाई के दौरान 60 दिन का कार्य विराम देकर किसान और श्रमिक दोनों को राहत मिलेगी। असल में मनरेगा का उद्देश्य रोजगार गारंटी था, लेकिन जमीनी स्तर पर कई खामियां सामने आईं। कार्य ग्राम व क्षेत्रीय विकास योजनाओं से नहीं जुड़ पाए, जिससे अस्थायी सड़कें, अधूरी जल संरचनाएं और अल्पकालिक मिट्टी कार्य ही अधिक हुए। साथ ही फर्जी जॉब कार्ड, डुप्लीकेट लाभार्थी, मनगढ़ंत हाजिरी, लंबित मजदूरी भुगतान जैसी शिकायतें बढ़ीं। सोशल ऑडिट प्रभावी नहीं रहा और केवल 6% प्रशासनिक व्यय सीमा के कारण निगरानी व क्रियान्वयन कमजोर पड़ा। खेती के सीजन में भी काम चलने से किसानों को मजदूरों की कमी झेलनी पड़ी, जबकि बेरोजगारी भत्ता और मुआवजे के प्रावधान कागजों तक रह गए। ^विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटी अधिनियम, 2025 (वीबी-जी रामजी) लागू किया गया है। ये ग्रामीण क्षेत्रों में सुनिश्चित आजीविका सुरक्षा, उच्च गुणवत्ता की टिकाऊ परिसंपत्तियां और तकनीक आधारित पारदर्शिता के जरिए भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाएगा। -मृदुल सिंह, सीईओ, जिला परिषद भरतपुर वही कार्य होंगे, जिनकी वास्तव में है जरूरत:- योजना सहकारी संघवाद पर आधारित है, जिसमें राज्यों की 40% भागीदारी से जवाबदेही बढ़ेगी। पीएम गति-शक्ति से जुड़ाव के कारण गांवों में वही कार्य होंगे, जिनकी वास्तव में जरूरत है जैसे पानी, स्थायी सड़कें और जरूरी बुनियादी ढांचा। वीबी-जी रामजी अधिनियम-2025 में अब पहली की मनेगा की कमियों को दूर किया गया है। सालाना रोजगार गारंटी 100 से बढ़ाकर 125 दिन, फसल बुवाई और कटाई के दौरान 60 दिन का कार्य विराम देकर किसान और श्रमिक दोनों को राहत, जल संसाधन, ग्रामीण बुनियादी ढांचा, आजीविका अवसंरचना और आपदा प्रबंधन से जुड़े ठोस व दीर्घकालिक कार्य, जियो-टैगिंग, सैटेलाइट इमेजरी, मोबाइल एप और एआई से निगरानी, हर छह माह में अनिवार्य डिजिटल सोशल ऑडिट, डिजिटल, बहुस्तरीय शिकायत निवारण और जिला लोकपाल की स्पष्ट भूमिका, साप्ताहिक मजदूरी भुगतान, दो सप्ताह से अधिक देरी पर स्वतः मुआवजा, प्रशासनिक मजबूती और अधिक बजट, प्रशासनिक व्यय की सीमा 6% से बढ़ाकर 9% कर दी गई है, जिससे पर्याप्त कार्मिक, तकनीकी विशेषज्ञता, प्रशिक्षण और निगरानी संभव होगी। इसके साथ ही स्पष्ट वार्षिक बजट वाला टिकाऊ वित्तीय मॉडल अपनाया गया है। कुल आवंटन बढ़ने से राज्यों को मनरेगा औसत की तुलना में करीब 17 हजार करोड़ रुपए अतिरिक्त मिलने की संभावना है।


