बोकारो | इस्पात मजदूर मोर्चा, सीटू की टीम ने ब्लास्ट फर्नेस विभाग पहुंच जन संपर्क अभियान चलाया। महामंत्री आरके गोरांई ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा 21 नवंबर को अधिसूचना जारी कर श्रम संहिताओं को मजदूर समर्थक और आधुनिकीकरण के रूप में चित्रित करने का प्रयास की है, जबकि वास्तव में अधिकारों का हनन है। देश का सर्वोच्च त्रिपक्षीय आधिकारिक मंच, भारतीय श्रम सम्मेलन ट्रेड यूनियनों के लगातार आग्रह के बावजूद पिछले 10 वर्षों से नहीं बुलाया गया है। सीटू, एटक, इंटक, एचएमएस, सेवा, एआईयूटीयूसी, एआईसीसीटीयू, यूटीयूसी, टीयूसीसी और अन्य सहित सभी केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों ने हर परामर्श में ठोस और अकाट्य तर्कों और दस्तावेजी प्रमाणों के साथ इन संहिताओं का सर्वसम्मति से विरोध किया। सरकार ने ट्रेड यूनियनों द्वारा उठाई गई हर बड़ी आपत्ति को नजरअंदाज कर दिया। विपक्ष की उपस्थिति के बिना ही इन संहिताओं को संसद में पारित कर दिया गया, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का मखौल उड़ाया गया। बोकारो के मजदूर भी आगामी 12 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल शामिल करेगी। अभियान में इश्तियाक अंसारी, एके राय, देव कुमार, आरआर पन्ना, जमील अख्तर, एचबी अंसारी आदि शामिल रहे।


