औसत एक्यूआई 200 के ऊपर:6 दिन से 10 सिगरेट के बराबर प्रदूषण में सांस ले रहे हम

राजधानी में बीते छह दिनों से औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 200 के पार यानी खराब श्रेणी में बना है। प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण पीएम 2.5 यानी धूल के बारीक कण हैं, जो फेफड़ों तक पहुंचकर गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ाते हैं। बीते साल की तुलना में इस बार प्रदूषण की स्थिति कहीं ज्यादा गंभीर है। 16 जनवरी 2025 को भोपाल का एक्यूआई 144 (मॉडरेट) था, जबकि इस साल यह करीब 40% तक बढ़ चुका है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह से देखें तो मौजूदा हालात में राजधानीवासी रोजाना 10 सिगरेट पीने के बराबर प्रदूषण सांस के जरिए शरीर में ले रहे हैं। एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच ने भोपाल समेत इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, सागर, उज्जैन, देवास और सिंगरौली को ‘नॉन-अटेनमेंट सिटी’ घोषित किया है। ये शहर पिछले 5 वर्षों से लगातार वायु गुणवत्ता मानकों पर फेल हो रहे हैं।एनजीटी ने राज्य सरकार को 8 हफ्ते में कमेटी गठित कर ठोस कार्ययोजना पेश करने के निर्देश दिए थे, पर अब तक कमेटी भी नहीं बन सकी। हवा में धूल के कण (पीएम 2.5) की मात्रा 22 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर… यह प्रदूषण 1 सिगरेट के धुएं के बराबर वायु गुणवत्ता विशेषज्ञों के अनुसार, जब हवा में पीएम-2.5 की मात्रा 22 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर होती है, तो उसे एक सिगरेट के धुएं के बराबर माना जाता है। भोपाल में बीते छह दिनों से औसत एक्यूआई 200 से ऊपर बना हुआ है, जिससे पीएम-2.5 का स्तर करीब 200 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर तक पहुंच रहा है। इस आधार पर राजधानीवासी रोजाना लगभग 10 सिगरेट पीने जितना प्रदूषण सांस के जरिए शरीर में ले रहे हैं।

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