भास्कर न्यूज | दंतेवाड़ाह गीदम वेयरहाउस में चावल खराब होने का मामला अभी पूरी तरह थमा भी नहीं था कि अब दंतेवाड़ा जिले के चितालंका वेयरहाउस से भी घुन लगा चावल निकलने का मामला सामने आया है। बताते हैं कि चावल पुराने स्टॉक का है, जिसे अब खपाने के लिए आश्रमों और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) की दुकानों में भेजा जा रहा है। इस पूरे मामले ने खाद्य सुरक्षा और भंडारण व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। मिली जानकारी के अनुसार, चितालंका वेयरहाउस से मेटापाल आश्रम के लिए चावल ट्रक में लोड किया जा रहा था। इसी दौरान चावल की गुणवत्ता खराब नजर आई। बोरे खोलने पर चावल में घुन लगा हुआ पाया गया। हैरानी की बात यह है कि इससे पहले इसी स्टॉक के 540 पैकेट चावल गीदम वेयरहाउस भेजे जा चुके हैं, जहां पहले से ही खराब चावल को लेकर विवाद चल रहा है। दंतेवाड़ा वेयरहाउस की मासिक खपत लगभग 9 हजार क्विंटल बताई जाती है, जबकि यहां 40 से 50 हजार क्विंटल तक चावल का स्टॉक हमेशा रखा जाता है। जरूरत से कई गुना अधिक स्टॉक होने के कारण चावल लंबे समय तक गोदामों में पड़ा रहता है, जिससे उसकी गुणवत्ता खराब हो रही है। चितालंका गोदाम से निकल रहा घुन लगा चावल जनवरी 2025 का स्टॉक बताया जा रहा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि गीदम वेयरहाउस में चावल की जांच कर उसे रखवाने वाला क्वालिटी इंस्पेक्टर वही है, जिसने दंतेवाड़ा वेयरहाउस में भी इसी स्टॉक को मंजूरी दी थी। इससे जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता और जिम्मेदारी पर सवाल उठ रहे हैं। वेयरहाउस के एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि गोदाम की निर्धारित क्षमता से अधिक चावल दबाव बनाकर रखवाया जाता है। गोदाम के एक कर्मचारी ने बताया राइस मिलर और क्वालिटी इंस्पेक्टर द्वारा दबाव बनाकर चावल रखवाया जाता है, क्षमता से अधिक चावल गोदाम में होने से रख -रखाव में दिक्कत आती है। राइस मिलर धान के उठाव के मुताबिक रिटन चावल जमा करते हैं, इसमें सबसे ज्यादा भूमिका क्वालिटी इंस्पेक्टर की होती है उन्हीं के द्वारा इसको पास कर गोदाम में रखवाया जाता है।


