सागर तक 38 किमी कम हो जाएगी दूरी, 1.30 घंटे का बचेगा समय

भास्कर संवाददाता| विदिशा भोपाल-कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर का काम विदिशा में तेजी से जारी है। इसके बनने के बाद सागर तक 38 किमी दूरी कम हो जाएगी। इसके अलावा 1.30 घंटे का टाइम भी बचेगा। भोपाल से सागर तक इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में 5429 करोड़ रुपए की लागत आएगी। इस फोरलेन हाइवे के बन जाने के बाद भोपाल एयरपोर्ट से रायसेन, विदिशा होकर सागर तक पहुंचना आसान हो जाएगा। एनएच 146 भोपाल-सागर हाइवे जबलपुर-कानपुर एक्सप्रेस हाइवे से भी जुड़ जाएगा। एनएचएआई विदिशा के प्रोजेक्ट डायरेक्टर सिद्धांत सिंघई ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा विकसित भोपाल-सागर बायपास कनेक्टिविटी परियोजना एक अत्यंत महत्वपूर्ण सड़क संरचना परियोजना है जो एनएच-146 को एनएच-44 से जोड़ने का काम करेगी। इस परियोजना से मध्य क्षेत्र में आवागमन, लॉजिस्टिक्स और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। दिसंबर 2027 में पूरा करने का लक्ष्य है। इसमें 91 अंडरपास बनेंगे, 11 मेजर ब्रिज बनाए जाएंगे। साथ ही 28 माइनर ब्रिज का निर्माण किया जा रहा है। साथ ही सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी। पहले भोपाल-सागर टू-लेन मार्ग की कुल लंबाई लगभग 201 किमी थी, जिसे घटाकर अब लगभग 163 किमी कर दिया गया है। किलोमीटर की दूरी में कमी आएगी । घंटे 30 मिनट से घटकर 3 घंटे हो जाएगा समय। घंटे की बचत होगी। एयरपोर्ट से विदिशा-सागर तक पहुंचना होगा आसान यह कॉरिडोर गांधी आश्रम तिराहा (भोपाल एयरपोर्ट के निकट) से प्रारंभ होकर भोपाल शहर के भीतर लगभग 19.4 किमी की लंबाई में गुजरता है। इससे राजा भोज एयरपोर्ट एवं भोपाल रेलवे स्टेशन की कनेक्टिविटी अत्यंत सुलभ हो गई है। साथ ही, शहर के भीतर यातायात प्रवाह में सुधार होगा तथा ट्रैफिक जाम एवं भीड़भाड़ में कमी आएगी। यह परियोजना गांधी आश्रम तिराहा भोपाल से प्रारंभ होकर रायसेन, विदिशा होकर सागर बायपास तक निर्बाध तरीके से जोड़ने का काम करेगी। इससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होगी। यह हाइवे भोपाल-कानपुर आर्थिक कॉरिडोर का भाग है। एनएच-44 (कश्मीर-कन्याकुमारी) कॉरिडोर से सीधे जोड़ने का काम भी करेगा। भोपालः गोविंदपुरा एवं आचारपुरा औद्योगिक क्षेत्र रायसेनः मण्डीदीप एवं बगरोदा औद्योगिक क्षेत्र विदिशाः जंबार-बागरी औद्योगिक क्षेत्र सागरः बीना रिफाइनरी -इससे लॉजिस्टिक लागत में कमी, औद्योगिक प्रतिस्पर्धा में वृद्धि तथा रोजगार के नए अवसरों का सृजन होगा।

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