थानों से शांतिभंग में हुई कार्रवाई की सुनवाई एसीपी कोर्ट में होती है। एसीपी कोर्ट कचहरी से जितनी दूर होगी, वादकारी को उतनी ही अधिक फीस चुकानी होगी। ऐसे में अधिवक्ताओं ने कचहरी के पास ही सभी सर्किल के एसीपी की कोर्ट स्थापित करने की मांग की। अधिवक्ताओं की इस समस्या को पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने भी समझा और उनकी मांग पर अपनी सहमति जताई। मौका था पुलिस कमिश्नर सभागार में अधिवक्ताओं और पुलिस अधिकारियों के बीच हुई समन्वय बैठक का। बैठक में कानपुर बार एसोसिएशन और दि लॉयर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। पुलिस कमिश्नर ने साफ किया कि वसूलीबाजों, भूमाफिया और अन्य संगठित अपराधों में लिप्त लोगों के खिलाफ पुलिस का अभियान लगातार जारी रहेगा। इसमें पुलिसकर्मी, अधिवक्ता शामिल पाए गए तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। बैठक में नए कानूनों, साइबर अपराध, महिला एवं बच्चों से संबंधित अपराधों, ट्रैफिक व्यवस्था और अधिवक्ताओं के आगामी चुनावों को लेकर भी बातचीत हुई। साइबर अपराधों में डिजिटल अरेस्ट, डीपफेक से हो रहे अपराध के बारे में बताया गया। अधिवक्ताओं ने कचहरी परिसर के आसपास पार्किंग और जाम की समस्या का मुद्दा उठाया। पुलिस आयुक्त ने सुझाव दिया कि अधिवक्ता ग्रुप बनाकर चार पहिया वाहनों से कचहरी आएं, जिससे ट्रैफिक और पार्किंग का दबाव कम होगा। अधिवक्ताओं ने थानों में सम्मानजनक व्यवहार की बात कही। पुलिस आयुक्त ने उन्हें पूर्ण सहयोग का भरोसा दिया। बैठक में जेसीपी अपराध विनोद कुमार सिंह, डीसीपी मुख्यालय दिनेश त्रिपाठी व दोनों एसोसिएशनों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।


