स्लीपर बसों की सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। लगातार आग की घटनाओं के बाद विभाग ने चेतावनी दी है कि तीन दिन के भीतर ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड (एआईएस) जांच नहीं कराने वाली स्लीपर बसों को सीधे ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। इसके तहत प्रदेश के सभी आरटीओ कार्यालयों से बस ऑपरेटर्स को नोटिस जारी कर बस समेत तलब किया गया है। बुधवार देर रात प्रदेशभर में चले विशेष चेकिंग अभियान में फायर सेफ्टी मानकों पर खरी नहीं उतरने वाली 27 स्लीपर बसें जब्त की गई थीं। इसके बाद अब दूसरे चरण की सख्त कार्रवाई शुरू कर दी गई है। नोटिस में साफ किया गया है कि तय समय सीमा के भीतर एआईएस मानकों के अनुरूप जांच कराना अनिवार्य होगा। क्या है एआईएस : यह तकनीकी सुरक्षा मानक है। इसमें बस की संरचना, इलेक्ट्रिकल सिस्टम और अग्नि सुरक्षा शामिल है। एआईएस-119 के तहत फायर अलार्म और फायर डिटेक्शन सिस्टम को जरूरी किया गया है। सख्ती : परमिट-फिटनेस पर भी रोक लगेगी
जांच नहीं कराने वाली बसों को वाहन पोर्टल पर ‘नॉट टू बी ट्रांजेक्टेड’ श्रेणी में डाल दिया जाएगा। ब्लैकलिस्ट के बाद बस ऑपरेटर्स को परमिट, फिटनेस जैसी सेवाओं का लाभ नहीं मिलेगा। राहत: एक माह फायर एक्सटिंग्विशर रखें
विभाग ने बस ऑपरेटर्स को एक माह की अस्थायी राहत दी है। इस दौरान बिना एआईएस-119 जांच के बसें चल सकेंगी, लेकिन हर बस में वैध 10 किग्रा का अग्निशमन यंत्र रखना अनिवार्य होगा। एनएचआरसी का दबाव : सभी सीएस कार्रवाई की जानकारी दें
बीते दो वर्षों में प्रदेश में स्लीपर बसों में आग की 20 से अधिक घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इस पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लेते हुए सभी राज्यों से कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। इसी दबाव के चलते मध्यप्रदेश में स्लीपर बसों की सुरक्षा पर सख्ती बढ़ाई गई है।


