कोटपूतली बहरोड़ कृषि विभाग के अनुसार, वर्तमान में रबी फसलों के लिए अनुकूल मौसम बना हुआ है। कृषि उप निदेशक डॉ. रामजी लाल यादव ने बताया कि ओस की बूंदें गेहूं और चने जैसी फसलों के लिए ‘अमृत’ समान हैं, जबकि 8-10 डिग्री सेल्सियस का तापमान भी फसलों के लिए फायदेमंद है। डॉ. यादव ने बताया कि ओस की बूंदें जमीन को प्राकृतिक गर्मी प्रदान करती हैं और गेहूं की फसल के लिए खाद का काम करती हैं। यह फसलों में नाइट्रोजन की कमी को दूर करने में भी सहायक होती हैं, जिससे पौधों का विकास बेहतर होता है। उन्होंने बताया कि धुंध की स्थिति तब बनती है जब गेहूं और अन्य फसलों के नीचे की जमीन गर्म होती है। सिंचाई या पहले गिरी ओस के कारण जमीन में यह गर्मी पैदा होती है। यह गर्मी भाप बनकर ऊपर उठती है और धुंध को नीचे नहीं आने देती, जो फसलों के लिए अत्यंत लाभकारी है। इस प्राकृतिक प्रक्रिया से गेहूं की फसल की वृद्धि प्राकृतिक रूप से बढ़ती है। इसके परिणामस्वरूप दाना बड़ा होता है और उपज में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना बढ़ जाती है।


