जोधपुर के मथानिया का नाम आते ही जेहन में तीखी मिर्च की याद आ जाती है। देशभर में अपनी अलग पहचान रखने वाली यहां की मिर्च पर इस बार मौसम ने करारा प्रहार किया है। जिसके चलते इस बात उत्पादन में कमी नजर आएगी। वहीं भावों में भी तेजी रहेगी। प्रगतिशील किसान खींवराज परिहार ने बताया कि बेमौसम बारिश, कोहरे की कमी और हल्की गर्मी से पैदावार गिरी है। पिछले साल की बात की जाए तो 430 बीघा में मिर्च की खेती की गई थी, लेकिन इस बार 500 बीघा से ज्यादा पर खेती की गई, लेकिन उत्पादन उम्मीद से कम है। जहां पहले 2200-2500 किलो प्रति बीघा होता था, वह अब 1600-2000 किलो तक सिमट गया। यानी 12 से 18 फीसदी की गिरावट है। किसान खींवराज ने कहा, पौधों से फल लगातार झड़ते रहे जिसके चलते उत्पादन घटा है। इसका असर बाजार में भी नजर आया। यहां लाल मिर्च के दामों में भी बढ़ोतरी हुई है। पिछले साल 2100-2200 रुपये प्रति 40 किलो के भाव इस बार चढ़कर 2500-2600 रुपये पर पहुंच गए हैं। बता दें कि मथानिया की लाल मिर्च का नाम देशभर में प्रसिद्ध है। यहां की उन्नत किस्म की लाल मिर्च के चलते मथानिया को मिर्च वाले कस्बे के नाम से जाना जाता है। यहां के प्रमुख किसान लाल मिर्च की खेती से जुड़े हुए हैं। गहरा लाल रंग और तीखेपन की वजह से मिर्च को लोग खूब पसंद करते हैं।


