मऊगंज में कांग्रेस ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) से महात्मा गांधी का नाम हटाने और इंदौर में दूषित पानी पीने से 23 मौतों के मामले को लेकर भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। जिला कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर शनिवार को कलेक्ट्रेट कार्यालय के सामने दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एक दिवसीय उपवास किया। कांग्रेस ने सरकार की नीतियों का किया विरोध इस उपवास के माध्यम से कांग्रेस ने सरकार की नीतियों का विरोध किया और संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों व मंत्रियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। शुक्रवार को भी कांग्रेस ने इन दोनों बड़े मुद्दों पर जोरदार प्रदर्शन किया था। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व विधायक सुखेंद्र सिंह बन्ना ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाना भाजपा सरकार की संकीर्ण और विभाजनकारी सोच को दर्शाता है। बन्ना ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार गांधी जी की विचारधारा से भयभीत है, इसलिए उनकी पहचान को योजनाओं से मिटाने का प्रयास कर रही है। कैलाश विजयवर्गीय के इस्तीफे की रखी मांग इंदौर की घटना को प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम बताते हुए बन्ना ने कहा कि दूषित पानी पीने से 23 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, फिर भी जिम्मेदार मंत्री संवेदनहीन बयान दे रहे हैं। उन्होंने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के “घंटा” जैसे शब्दों के इस्तेमाल को शर्मनाक बताया और उनके तत्काल इस्तीफे की मांग की। कांग्रेस ने कहा-सरकार की जनविरोधी नीतियों का विरोध जारी रहेगा यह कार्यक्रम जिला कांग्रेस अध्यक्ष हरिलाल आदिवासी के नेतृत्व में आयोजित किया गया, जिसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में आमजन शामिल हुए। इस दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देश पर पूरे प्रदेश में चल रहे आंदोलन के तहत इंदौर से राहुल गांधी का लाइव प्रसारण भी दिखाया गया, जिसे लोगों ने देखा। कांग्रेस नेताओं ने जोर देकर कहा कि पार्टी सत्ता में न होने के बावजूद जनता के हर मुद्दे पर संघर्ष करती रहेगी और सरकार की जनविरोधी नीतियों का विरोध जारी रहेगा।


