प्रदेश में तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता परखने के लिए पहली बार शासकीय पॉलिटेक्निक और आईटीआई का मूल्यांकन होगा। इसके तहत सभी संस्थानों की रैंकिंग होगी। एडमिशन, रिजल्ट, प्लेसमेंट के आधार पर इन संस्थानों को अंक दिए जाएंगे। रैंकिंग आने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि कौन-सा संस्थान बेहतर प्रदर्शन कर रहा है और किसमें सुधार की आवश्यकता है। तकनीकी शिक्षा से 238 संस्थानों की रैंकिंग की तैयारी की गई है। जल्द ही प्रक्रिया शुरू होगी। अभी राज्य में 38 शासकीय पॉलिटेक्निक और 200 शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) संचालित हैं। इन सभी संस्थानों का मूल्यांकन करने के लिए तकनीकी शिक्षा विभाग ने क्वालिटी कंट्रोल ऑफ इंडिया से एमओयू किया है। अधिकारियों ने बताया कि मूल्यांकन के लिए कुछ पैरामीटर तय हैं। इसके अनुसार, संस्थान में उपलब्ध सीटों की संख्या, प्रवेश की स्थिति, फैकल्टी की संख्या, शिक्षण पद्धति, छात्रों के परीक्षा परिणाम, शैक्षणिक एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों की स्थिति तथा शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता का भी आकलन किया जाएगा। मूल्यांकन में यह भी देखा जाएगा कि शिक्षक कौशल बढ़ाने के लिए क्या प्रयास कर रहे हैं। तकनीकी संस्थानों में जान फूंकने की कवायद जानकारों का कहना है कि बीते एक दशक में प्रदेश के पॉलिटेक्निक और आईटीआई में प्रवेश लेने वाले छात्रों की संख्या कम हुई है। बड़ी संख्या में सीटें खाली रहती हैं। कोर्स करने के बाद छात्रों को प्लेसमेंट में भी दिक्कतें आती हैं। इस नजरिए से यह पहल इन संस्थानों को नया स्वरूप देने में कारगर होगी। अधिकारियों का कहना है कि मूल्यांकन के पीछे सरकार की मंशा यह है कि प्रदेश के सभी शासकीय पॉलिटेक्निक और आईटीआई की वास्तविक स्थिति सामने आ सके। जिन संस्थानों का प्रदर्शन बेहतर होगा, वहां नए और रोजगारपरक पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे, जबकि कमजोर संस्थानों में कमियों को चिन्हित कर सुधारात्मक कार्ययोजना तैयार की जाएगी। नैक की तरह ग्रेड नहीं मिलेगा, 1, 2, 3 के अनुसार रैंकिंग मूल्यांकन के बाद पॉलिटेक्निक और आईटीआई काे ए, बी, सी ग्रेड नहीं मिलेगी। 1, 2, 3 के अनुसार रैंकिंग होगी। ऐसे समझें- प्रदेश में 38 पॉलिटेक्निक हैं। मूल्यांकन के बाद किसी कॉलेज के नंबर सबसे अधिक आते हैं तो उसकी रैंकिंग एक होगी। जिनके नंबर सबसे कम होंगे, उसे 38वां स्थान मिलेगा।
आईटीआई के लिए भी यही फॉर्मूला अपनाया जाएगा। बता दें कि उच्च शिक्षा से जुड़े कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की नैक के माध्यम से ग्रेडिंग होती है। इसमें ए, बी, सी, डी ग्रेड दिया जाता है। देश में शिक्षण संस्थानों की ग्रेडिंग और रैंकिंग के लिए अलग-अलग संस्थाएं हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने 2015 में नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) शुरू किया, जिसके तहत विश्वविद्यालय, कॉलेज, इंजीनियरिंग, प्रबंधन, चिकित्सा सहित उच्च शिक्षा संस्थानों को उनके प्रदर्शन, गुणवत्ता और शैक्षणिक उत्कृष्टता के आधार पर रैंक दी जाती है। एनबीए और नैक तकनीकी व उच्च शिक्षा संस्थानों की गुणवत्ता का आकलन करती हैं। गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु में आईटीआई की राज्य स्तरीय ग्रेडिंग व्यवस्था लागू है। पता लगेगा मजबूत व कमजोर संस्थान कौन पॉलिटेक्निक व आईटीआई की रैंकिंग होगी। इससे स्पष्ट होगा कि कौन-सा संस्थान किस क्षेत्र में बेहतर और कहां कमजोर है। इसी आकलन के आधार पर संस्थानों को चरणबद्ध तरीके से अपग्रेड किया जाएगा।
-गुरु खुशवंत साहेब, मंत्री तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार


