गांव लौटने पर मारे जाने का डर:नक्सल पीड़ित परिवारों के मकानों पर चला बुलडोजर

जिला मुख्यालय के नया बस स्टैंड के पीछे चट्‌टानपारा इलाके में शुक्रवार को पालिका बुलडोजर चला। इसने 55 मकान ढहा दिए। इनमें कुछ नक्सलियों के खात्मे में पुलिस की मदद करने वाले डीआरजी जवानों, तो कई नक्सल पीड़ित परिवारों के मकान हैं। ये लोग अपनी और परिवार की जान बचाने के लिए सालों पहले अपना गांव छोड़कर यहां आ गए थे। अब छत के नाम पर खुला आसमान और सोने के लिए जमीन है। विस्थापन का इंतजाम न होने से रहने का दूसरा और ठौर नहीं रहा। अभी गांव वापस नहीं लौट सकते क्योंकि नक्सलियों के हाथों मारे जाने का डर है। कुल मिलाकर पालिका की कार्रवाई ने इन परिवारों का सुख-चैन छीन लिया है। बता दें कि कार्रवाई के तहत पालिका ने 55 मकानों को तोड़ा है। शांतिनगर में भी 20 मकानों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही जा रही है। इस कार्रवाई में डीआरजी जवानों के मकान भी तोड़े गए हैं। बताते हैं कि नया बस स्टैंड के पीछे के इलाके में अधिकांश परिवार बीते कुछ सालों से रह रहे थे। प्रशासन और नगर पालिका ने उन्हें नोटिस भी जारी किया, लेकिन अतिक्रमण खाली नहीं हुआ। दूसरी ओर प्रभावितों का कहना है कि मजबूरी में अपना गांव छोड़कर यहां गुजर-बसर को मजबूर हैं। अगर अब शासन-प्रशासन भी उनकी नहीं सुनेगा, तो वे कहां जाएंगे। इस कार्रवाई ने उन्हें रोड़ पर ला दिया है। पति ऑपरेशन पर, लौटने से पहले पत्नी-बच्चे हो गए बेघर
पुष्पा गटपल्ली के पति डीआरजी में बतौर जवान पदस्थ हैं। वह घर पर थीं और उनके पति एंटी नक्सल ऑपरेशन पर गए हुए हैं, जो तीन दिन बाद लौटेंगे। पति के ऑपरेशन में जाने के कारण वे अपने 3 बच्चों को लेकर अपने घर पर रह रही थी। कुल 75 मकान तोड़े जाने हैं, 20 तो शांति नगर में हैं
अतिक्रमण के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के लिए प्रशासन ने दो जगहों पर 75 अवैध मकानों की सूची तैयार की है। पहले में जहां न्यू बस स्टैंड के 55 मकानों को जमींदोज किया, वहीं दूसरे में शांतिनगर के 20 मकानों पर प्रशासन का मशीनी पंजा चलेगा। महिलाओं की आंखों से छलका दर्द- कहां जाएंगे?
शुक्रवार सुबह से ही नगर पालिका का अमला, वन, राजस्व विभाग व पुलिस का अमला अफसरों समेत यहां डटा रहा। अतिक्रमण हटाने के दौरान महिलाओं का दर्द उनकी आंखों से छलक पड़ा। यहां रह रही गंगा माड़वी ने कहा कि वह अपने परिवार के साथ बीते 4 सालों से यहां नक्सल हिंसा के कारण गांव छोड़कर यहां मकान बनाकर रह रही थी। प्रशासन की अनुमति के बाद उन्होंने मकान बनाया और नियमित कर भी जमा किए। अब प्रशासन उनके घरों को तोड़ चुका है। बीते दो सालों से कब्जाधारियों को नोटिस दी जाती रही है। 22 दिसंबर को आखिरी बार नोटिस देकर कब्जा खाली नहीं करने पर मकानों को तोड़ने की चेतावनी भी दी गई थी, बावजूद कब्जा खाली नहीं किया गया।
बंशीलाल नुरूटी, नपा सीएमओ अतिक्रमण हटाने कब्जाधारियों को लगातार नोटिस दिए जाने के बावजूद कब्जा खाली नहीं किया गया। इसलिए कार्रवाई करनी पड़ी है। सरकारी जमीन पर अवैध अतिक्रमण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
संबित मिश्रा , कलेक्टर

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