छत्तीसगढ़ के बीजापुर में विस्थापित परिवारों के घरों पर बुलडोजर चलाए जाने के मामले ने सियासी तूल पकड़ लिया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस कार्रवाई को लेकर सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि नक्सलियों के डर से घर-गांव छोड़कर आए लोगों के मकानों को तोड़ना अमानवीयता की पराकाष्ठा है। भूपेश बघेल ने कहा कि ये लोग कोई व्यवसाय या अतिक्रमण के जरिए फायदा नहीं उठा रहे थे, बल्कि अपनी जान बचाने के लिए यहां आकर बसे थे। सरकार चाहती तो इनका व्यवस्थापन कर सकती थी, लेकिन इस सरकार में संवेदनशीलता नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में अधिकारी राज चल रहा है।पूर्व मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया—कोई व्यक्ति अपना घर, खेत और गांव आखिर क्यों छोड़ना चाहेगा? क्या है पूरा मामला बीजापुर के न्यू बस स्टैंड के पीछे स्थित चट्टानपारा इलाके में प्रशासन ने आज अवैध अतिक्रमण बताते हुए 55 मकानों पर बुलडोजर चला दिया। इस कार्रवाई के बाद इलाके में रहने वाले 55 परिवार बेघर हो गए। कार्रवाई के दौरान एक डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG) जवान का घर भी तोड़ दिया गया। जवान उस वक्त ड्यूटी पर था। उसकी पत्नी ने बताया कि वे 2006 से यहां रह रहे हैं और उनके गांव में अब कोई घर नहीं बचा है। इस दौरान कई महिलाओं की रोती हुई तस्वीरें सामने आईं, जो प्रशासन से सवाल कर रही थीं—अब हम कहां जाएंगे? नक्सली हिंसा से बचकर आए थे पीड़ित गंगा माड़वी ने बताया कि वे अपने परिवार के साथ पिछले 4 सालों से यहां रह रहे थे। नक्सली हिंसा के कारण उन्हें गांव छोड़ना पड़ा था। प्रशासन से बातचीत के बाद उन्होंने यहां मकान बनाया और नियमित रूप से टैक्स भी जमा कर रहे थे।गंगा का कहना है कि गांव लौटने पर नक्सलियों का खतरा है। तीन महीने पहले मकान खाली करने का नोटिस मिला था, जिस पर मामला कोर्ट में विचाराधीन है। उन्हें यह भरोसा भी दिलाया गया था कि मकान नहीं तोड़ा जाएगा, लेकिन इसके बावजूद अचानक कार्रवाई कर दी गई। प्रशासन का पक्ष नगर पालिका परिषद बीजापुर के सीएमओ बीएल नुरेटी ने बताया कि न्यू बस स्टैंड के पीछे स्थित 55 मकानों को हटाया जा रहा है। इसके अलावा शांति नगर में 20 मकानों पर भी आगे कार्रवाई की जाएगी। ठंड में खुले आसमान के नीचे रात दैनिक भास्कर की टीम ने रात में मौके पर पहुंचकर प्रभावित परिवारों से बातचीत की। जो परिवार कल तक पक्के मकानों में रह रहे थे, वे अब उजड़े आशियानों के पास पॉलीथिन ओढ़कर ठंड में रात बिताने को मजबूर हैं। कार्रवाई के दौरान और बाद में प्रशासन की ओर से न पीने के पानी की व्यवस्था की गई, न ही भोजन की। अचानक हुई इस कार्रवाई से महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।


