श्योपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने डॉक्टर लापरवाही के मामले में पीड़ित महिला के पक्ष में फैसला सुनाया है। आयोग ने बीमा कंपनी, अस्पताल और संबंधित डॉक्टरों को मुआवजा देने का आदेश दिया है। यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को एक लाख रुपये की क्षतिपूर्ति देने के निर्देश दिए गए हैं। यह फैसला प्रकरण क्रमांक 01/2023 में दिया गया, जिसमें श्योपुर निवासी फरहत नसीम पत्नी मोहम्मद इस्हाक अंसारी ने जयपुर स्थित खंडाका हॉस्पिटल के खिलाफ परिवाद प्रस्तुत किया था। फरहत नसीम को लंबे समय से दोनों घुटनों में दर्द की शिकायत थी। 2022 में हुआ था ऑपरेशन सितंबर 2022 में उन्होंने खंडाका हॉस्पिटल, जयपुर में परामर्श लिया। डॉक्टरों ने घुटनों के ऑपरेशन की सलाह दी और लगभग तीन लाख रुपए का खर्च बताया। उन्हें यह भी आश्वासन दिया गया था कि ऑपरेशन के बाद दो दिन में वे सामान्य रूप से चल सकेंगी। इसके बाद 15 अक्टूबर 2022 को उनका ऑपरेशन किया गया। आवेदिका फरहत नसीम का आरोप था कि ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों ने पर्याप्त सावधानी नहीं बरती, जिसके कारण उनके बाएं पैर में हेयरलाइन फ्रैक्चर हो गया। इससे उन्हें अत्यधिक दर्द और परेशानी का सामना करना पड़ा। गंभीर अवस्था में ही उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। बाद में दोबारा इलाज के लिए 10 हजार रुपए जमा कराए गए, लेकिन उनकी हालत में सुधार के बजाय परेशानी और बढ़ गई। इसे सेवा में कमी और चिकित्सीय लापरवाही मानते हुए उन्होंने उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर किया। सुनवाई के दौरान अस्पताल और डॉक्टरों ने तर्क दिया कि आवेदिका की उम्र, डायबिटीज और हाइपोथायरॉइडिज्म जैसी बीमारियों के कारण उनकी हड्डियां कमजोर थीं। उनका कहना था कि ऑपरेशन के दौरान हेयरलाइन फ्रैक्चर होना संभावित था। आयोग ने पाया कि इस संभावित जोखिम की स्पष्ट जानकारी और लिखित हिदायत आवेदिका को दिए जाने के ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए गए। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि ऑपरेशन के दौरान फ्रैक्चर होना और मरीज को पूर्व में पर्याप्त रूप से अवगत न कराना आंशिक चिकित्सीय उपेक्षा और सेवा में कमी को दर्शाता है। इसी आधार पर आयोग ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को एक लाख रुपए क्षतिपूर्ति देने के निर्देश दिए हैं।


