सोलर प्लांट लगाने में देश में अव्वल राजस्थान को पिछले तीन साल से कुसुम सी योजना की सब्सिडी नहीं मिलीं है। कुसुम सी योजना के तहत राजस्थान की तीनों बिजली कंपनियां 3674 मेगावाट क्षमता के छोटे प्लांट खेतों में स्थापित कर रही हैं, लेकिन मिनिस्ट्री ऑफ न्यू एंड रिनेबल एनर्जी (एमएनआरई) से 2500 करोड़ से ज्यादा रिलीज नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में प्लांट स्थापित करने के लिए 12 हजार करोड़ रुपए का लोन ले चुके निवेशकों और किसानों की वित्तीय हालत खराब हो रही हैं। प्लांट कमीशंड होने के बाद हर माह 2472 लाख यूनिट (एलयू) यानी रोजाना 67.46 एलयू बिजली का उत्पादन शुरू हो गया है, लेकिन सब्सिडी जारी नहीं होने से किसानों को जेब से बैंक की किस्तें देनी पड़ रही हैं। योजना के सर्वाधिक प्लांट जोधपुर में जोधपुर डिस्कॉम > कुल प्लांट 1308, क्षमता 3361 मेगावाट
जयपुर डिस्कॉम >कुल प्लांट 92, क्षमता 212 मेगावाट
अजमेर डिस्कॉम >कुल प्लांट 42, क्षमता 99.34 मेगावाट 1 साल से नहीं मिली राशि
गोपाराम फौजी का कहना है कि कुसुम-सी योजना के तहत बेरडो का बास चिराई में उनका 2 मेगावाट का सोलर प्लांट स्थापित है, जिसे शुरू हुए एक वर्ष हो चुका है। योजना के तहत मिलने वाली 35 लाख रुपए की सब्सिडी अब तक नहीं मिली है। सब्सिडी अटकने से आर्थिक दबाव है। 3674 मेगावाट क्षमता के प्लांट स्थापित हो रहे हैं
राजस्थान में कुसुम सी योजना के तहत 3674 मेगावाट क्षमता के प्लांट स्थापित हो रहे हैं। एक मेगावाट की लागत 3.5 करोड़ है। इस हिसाब से 12859 करोड़ का लोन किसान-निवेशक ले चुके हैं। मिनिस्ट्री ऑफ न्यू एंड रिनेबल एनर्जी (एमएनआरई) से प्रति मेगावाट करीब 1 करोड़ का सीएफए देय है। छोटे सोलर पंप की संख्या को निकाल दें तो 2500 करोड़ रुपए से ज्यादा की सीएफए यानी सब्सिडी बनती है। “कुसुम सी योजना की सब्सिडी किसानों को जारी होने में देरी हुई है। इसे जल्द रिलीज करने के लिए एमएनआरई से संपर्क किया जा रहा है। अगले माह से राजस्थान को सब्सिडी शुरू होने की उम्मीद हैं।”
-अजिताभ शर्मा, एसीएस, ऊर्जा विभाग


