नीमच के मनासा क्षेत्र में बच्चों में गिलियन बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) के संदिग्ध मामले सामने आने के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह एक्टिव हो गया है। शनिवार रात कलेक्टर हिमांशु चंद्रा ने दल-बल के साथ जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण किया और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को सख्त चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि इलाज के दौरान मरीजों की किसी भी स्तर पर अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जिला अस्पताल में ही मरीजों का निशुल्क और तुरंत इलाज सुनिश्चित किया जाए, और केवल बेहद गंभीर या अनिवार्य मामलों में ही किसी मरीज को रेफर किया जाए। अस्पताल में भर्ती दो बच्चों के स्वास्थ्य की जानकारी ली कलेक्टर ने अस्पताल में भर्ती मनासा के दो बच्चों के स्वास्थ्य की जानकारी ली। डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि बच्चों में जीबीएस के लक्षण नहीं हैं और उनकी हालत में तेजी से सुधार हो रहा है। कलेक्टर ने इन बच्चों के डिस्चार्ज होने के बाद भी फिजियोथैरेपी, जिंक और ओआरएस वितरण की पुख्ता व्यवस्था करने के निर्देश दिए। प्रशासनिक तैयारियों को पुख्ता करते हुए, कलेक्टर ने आपात स्थिति के मद्देनजर जिले में एयर एंबुलेंस की त्वरित उपलब्धता सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं। साथ ही, स्वास्थ्य विभाग को पिछले सात दिनों में निजी अस्पतालों में भर्ती हुए मरीजों का फॉलोअप लेने और उनकी जरूरत के अनुसार मदद करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस मुहिम में आयुष विभाग को भी सक्रिय भूमिका निभाने को कहा गया है। कलेक्टर बोले-अस्वच्छ भोजन, खुला पानी जानलेवा कलेक्टर चंद्रा ने आमजन को सख्त संदेश देते हुए कहा कि अस्वच्छ भोजन, खुला पानी और बिना डॉक्टरी सलाह के दवा लेना जानलेवा हो सकता है। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि वे पानी उबालकर पिएं, स्वच्छता का ध्यान रखें और भोजन ताजा व ढका हुआ ही खाएं। निरीक्षण के दौरान एडीएम बी.एस. कलेश, एसडीएम संजीव साहू, सीएमएचओ डॉ. आर. के. खद्योत और सिविल सर्जन डॉ. महेंद्र पाटिल सहित जिले के वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ चिकित्सक उपस्थित रहे।


