सिंगरौली जिले की जनपद पंचायत चितरंगी अंतर्गत ग्राम पंचायत बरहट में आवारा मवेशियों के कारण किसानों की फसलें तबाह हो रही हैं। इस समस्या के बावजूद, पंचायत स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। बरहट में आवारा मवेशियों के झुंड खेतों में घुसकर गेहूं, चना और सरसों की फसलों को लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं। किसानों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद पंचायत ने कोई व्यवस्था नहीं की है। गांव में न तो कोई गौशाला है और न ही मवेशियों को रोकने के लिए कोई योजना बनाई गई है। सरपंच ने बात करने से इनकार किया ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत में सरपंच की जगह उनके पति कामकाज संभालते है, जिससे प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं। दैनिक भास्कर ने इस मामले में ग्राम पंचायत बरहट की सरपंच प्रीति सिंह से संपर्क करने का प्रयास किया। उन्होंने गलत नंबर देकर सचिव से बात करने को कहा और अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। जिस सचिव से संपर्क कराया गया, वह इस ग्राम पंचायत के सचिव नहीं निकले। इसके बाद वास्तविक सचिव मुन्नू चौहान से बात की गई। उन्होंने स्पष्ट कहा, “हमारी ग्राम पंचायत में आवारा मवेशियों को रोकने की कोई व्यवस्था नहीं है।” उनके बयान से स्पष्ट है कि समस्या की जानकारी होने के बावजूद पंचायत ने कोई पहल नहीं की है। पंचायत में सभी निर्णय सरपंच के बजाय पति लेता है ग्रामीण प्रमोद द्विवेदी ने आरोप लगाया कि पंचायत में सभी निर्णय सरपंच के बजाय उनके पति द्वारा लिए जाते हैं, जिससे प्रशासनिक जवाबदेही पूरी तरह खत्म हो गई है। उन्होंने बताया कि आवारा मवेशियों के संबंध में कई बार सरपंच के पति से बात की गई, लेकिन उन्होंने कोई ध्यान नहीं दिया। इस पूरे मामले में चितरंगी जनपद के सीईओ मानसिंह से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। वहीं, जिला सीईओ जगदीश जी ने भी इस विषय पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।


