सिम्स में बच्चे के घुटने का सफल ऑपरेशन:जन्मजात दुर्लभ ‘पटेला डिस्लोकेशन’ का हुआ इलाज, 1 लाख में से 5-6 में पाई जाती है

बिलासपुर स्थित सिम्स अस्पताल के आर्थोपेडिक विभाग ने 5 साल के बच्चे के जन्मजात घुटने की कटोरी (हैबिचुअल पटेला डिस्लोकेशन) का सफल ऑपरेशन किया। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, यह बीमारी अत्यंत दुर्लभ है, जो लगभग एक लाख बच्चों में से केवल 5 से 6 बच्चों में पाई जाती है। लोरमी निवासी गुलशन साहू को चलने-फिरने में गंभीर दिक्कत के चलते सिम्स के आर्थोपेडिक ओपीडी में लाया गया था। बच्चे के घुटने की कटोरी चलते समय बार-बार अपनी जगह से खिसक जाती थी, जिससे उसे सामान्य गतिविधियों में परेशानी होती थी। जांच में हुई दुर्लभ बीमारी की पुष्टि आर्थोपेडिक विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. संजय घिल्ले ने बच्चे की जांच की। एक्स-रे और एमआरआई जांच के बाद ‘हैबिचुअल पटेला डिस्लोकेशन’ की पुष्टि हुई। डॉ. के अनुसार, यह एक जन्मजात विकृति है, जिसमें घुटने की कटोरी को नियंत्रित करने वाली मांसपेशियां एक ओर से अधिक कसी हुई और दूसरी ओर से ढीली होती हैं, जिससे पटेला स्थिर नहीं रह पाती। आयुष्मान भारत योजना के तहत निशुल्क इलाज अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि यह जटिल सर्जरी आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत पूरी तरह निशुल्क की गई, जिससे परिजनों को आर्थिक राहत मिली। गंभीरता को देखते हुए आर्थोपेडिक विभागाध्यक्ष डॉ. ए. आर. बेन को प्रकरण की जानकारी दी गई। 29 दिसंबर को बच्चे का ऑपरेशन किया गया। सर्जरी के दौरान घुटने की कटोरी के एक ओर की मांसपेशी को टाइट किया गया और दूसरी ओर की मांसपेशी को ढीला किया गया। मेडिकल पब्लिकेशन के अनुसार इसमें VMO प्लास्टी और क्वाड्रिसेप्स Z-लेंथनिंग तकनीक का उपयोग किया गया। ऑपरेशन के बाद बच्चा पूरी तरह स्वस्थ ऑपरेशन के बाद बच्चे की घुटने की कटोरी पूरी तरह स्थिर हो गई है और अब वह सामान्य रूप से चलने-फिरने में सक्षम है। ऑपरेशन टीम में आर्थोपेडिक विभागाध्यक्ष डॉ. ए. आर. बेन, डॉ. संजय घिल्ले (असिस्टेंट प्रोफेसर), डॉ. अविनाश अग्रवाल और डॉ. प्रवीन द्विवेदी शामिल रहे। निश्चेतना विभाग से विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति, डॉ. मिल्टन और डॉ. श्वेता कुजूर ने सेवाएं दीं। आधुनिक संसाधनों का सही उपयोग- सिम्स प्रबंधन सिम्स प्रबंधन के अनुसार स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के निर्देशन में शासकीय चिकित्सा संस्थानों को लगातार आधुनिक संसाधन, उन्नत उपकरण और मानव संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। सिम्स में इस तरह की जटिल सर्जरी का सफल होना इसी का प्रमाण है। पहली बार हुआ ऐसा ऑपरेशन सिम्स के डीन डॉ. रमणेश मूर्ति ने बताया कि यह ऑपरेशन सिम्स में पहली बार किया गया है, जो संस्थान की बढ़ती तकनीकी क्षमता और चिकित्सकों की दक्षता को दर्शाता है। वहीं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत निशुल्क इलाज प्रदान कर जरूरतमंद मरीजों को राहत देना सिम्स की प्राथमिकता है।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *