जंगल में लावारिस हालात में मिला धान से भरा ट्रक:बालोद में सहकारी समिति से 900 बोरा लेकर निकला ट्रक; 200 बोरा धान गायब

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से जिला विपणन विभाग की बड़ी लापरवाही और निष्क्रियता का मामला सामने आया है। गुंडरदेही विकासखंड अंतर्गत कोड़ेवा धान खरीदी केंद्र से 13 जनवरी को 900 बोरा धान भरकर मालीघोरी संग्रहण केंद्र के लिए रवाना हुआ ट्रक अब तक अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पाया। शनिवार देर शाम यह ट्रक बालोद-कांकेर जिले की सीमा से लगे गुरुर थाना क्षेत्र के गांव दमकसा के पास घने जंगल में सड़क किनारे लावारिस हालत में मिला। ट्रक का केबिन लॉक था और चालक मौके से गायब मिला। प्रारंभिक जांच में ट्रक से करीब 200 से 250 बोरा धान गायब होने की बात सामने आ रही है। सरकारी धान से भरे ट्रक के इस तरह लावारिस मिलने की सूचना के बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। मौके पर उप पंजीयक राजेंद्र राठिया, तहसीलदार हनुमंत श्याम सहित गुरुर थाना प्रभारी पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। जीपीएस के बावजूद नहीं हुई निगरानी इस पूरे घटनाक्रम में जिला विपणन विभाग और संबंधित ट्रांसपोर्टर की भूमिका संदिग्ध है। बताया गया है कि ट्रक में जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम लगा हुआ है। इसके बावजूद 13 जनवरी से अब तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने ट्रक की स्थिति की कोई खोज-खबर नहीं ली। जो गंभीर सवाल खड़े करता है। अब तक नहीं हुआ ट्रक का धर्मकांटा जिला खाद्य अधिकारी तुलसी ठाकुर ने बताया कि शनिवार शाम बड़भूम के दमकसा के पास धान से भरा ट्रक लावारिस हालत में मिला है। ट्रक दमन मनदीप ट्रांसपोर्टर का है। जिसका क्रमांक सीजी 08 एवी 1711 है। उन्होंने बताया कि 6 जनवरी को डीओ जारी हुआ था। जिसके तहत 13 जनवरी को 900 बोरा सरना धान कोड़ेवा सोसायटी से मालीघोरी संग्रहण केंद्र के लिए भेजा गया था। लेकिन अब तक ट्रक का धर्मकांटा नहीं हुआ है। आई-ट्रिपल-थ्री से मांगा गया पूरा डिटेल खाद्य अधिकारी के अनुसार ट्रक की जानकारी रायपुर स्थित आई-ट्रिपल-थ्री (इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर) को भेज दी गई है। 13 से 17 जनवरी तक ट्रक की पूरी मूवमेंट रिपोर्ट मांगी गई है। डिटेल आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कोड़ेवा से निकलने के बाद ट्रक कहां-कहां गया। फिलहाल ट्रक को गुरुर थाना परिसर में खड़ा कराया गया है। प्रशासन द्वारा आगे की कार्रवाई की जा रही है। ट्रक का धर्मकांटा कराने के बाद धान के बोरे खाली कर गिनती की जाएगी। जिसके बाद वास्तविक नुकसान का आंकलन हो सकेगा।

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