राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी महोत्सव के उपलक्ष्य में वराडा हनुमानजी धाम में विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में क्षेत्रभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु, मातृशक्ति, धर्मप्रेमी बंधु और संघ स्वयंसेवक उपस्थित रहे। यह कार्यक्रम संत मंगल गिरी महाराज, राम गिरि महाराज जावाल, रमेशभारती महाराज वराडा और वीरनाथ महाराज देलदर धाम के महंत के सानिध्य में संपन्न हुआ। संतों की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष आध्यात्मिक गरिमा प्रदान की। सम्मेलन को संबोधित करते हुए संत मंगल गिरी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि वर्तमान समय हिंदू समाज के लिए जागरण, संगठन और आत्मबल को मजबूत करने का है। उन्होंने जोर दिया कि हिंदू समाज की वास्तविक शक्ति उसकी एकता, संस्कार और संगठन में निहित है। संत मंगल गिरी महाराज ने स्पष्ट किया कि यदि हिंदू समाज कमजोर होता है, तो इसका प्रभाव केवल समाज तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे राष्ट्र की सुरक्षा, संस्कृति और पहचान पर पड़ता है। उन्होंने हिंदू समाज से जाति-वर्ग के भेद से ऊपर उठकर एकजुट, जागरूक और संगठित बनने का आह्वान किया। उन्होंने मातृशक्ति की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि संस्कारों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण का कार्य माताओं-बहनों के हाथों में है। उनके अनुसार, जब मातृशक्ति जागृत होती है, तब समाज स्वतः सशक्त बनता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला प्रचारक योगेश कुमार ने अपने मार्गदर्शक उद्बोधन में कहा कि आज के समय में हिंदू संगठन कोई विकल्प नहीं, बल्कि एक परम आवश्यकता बन चुका है। उन्होंने बताया कि संघ पिछले सौ वर्षों से समाज में अनुशासन, सेवा, राष्ट्रभक्ति और संस्कार का कार्य निरंतर करता आ रहा है।


