भास्कर न्यूज | महुआडांड़ थाना क्षेत्र अंतर्गत हामी–ओरसा मुख्य पथ पर ओरसा के बंगलादारा घाटी में अनियंत्रित होकर खाई की ओर बढ़ी बस को किनारे स्थित एक सखुआ (साल) के पेड़ ने रोक लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बस तेजी से सड़क किनारे गहरी खाई की ओर बढ़ने लगी। यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। ऐसा लगा कि बस सीधे नीचे खाई में गिर जाएगी। तभी बस एक विशाल सखुआ के पेड़ से जाकर टकरा गई। पेड़ इतना मजबूत था कि उसने पलटने के बाद भी बस के पूरे वेग को झेल लिया और उसे खाई के मुहाने पर ही थाम लिया। नहीं तो बस खाई में गिर जाती। लोगों ने कूद कर जान बचाई। उधर सीएचसी में मात्र एक चिकित्सक रहने से शुरुआत में इलाज में परेशानी हुई। चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अमित खलखो ने बताया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में वर्तमान में वे एकमात्र चिकित्सक के रूप में कार्यरत हैं। जैसे ही दुर्घटना की सूचना मिली, प्रखंड के विभिन्न निजी क्लीनिकों के डॉक्टर एवं उनके सहयोगी तत्काल सीएचसी पहुंचे और घायलों के उपचार में सक्रिय सहयोग किया। सीमित संसाधनों और चिकित्सकों की कमी के बावजूद सभी घायलों को प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया गया। सभी मृतक छत्तीसगढ़ के रहनेवालने थे हादसे में जान गंवाने वाल सभी मृतक ग्राम पीपरसोत, थाना बलरामपुर, जिला बलरामपुर (छत्तीसगढ़) के निवासी बताए गए हैं। इनकी हुई है मौत 1.रेशांति देवी (35), पति विनोद राम 2.प्रेमा देवी (37), पति चुहरू राम 3.सीता देवी (45), पति बीगा राम 4.सुखना भुईयां (40), पिता सत्ता भुईयां 5.सोनामति देवी (45), पति बाबूलाल नायक 6.विजय सिंह (32), पिता कुंता सिंह 7. महिला अज्ञात सिर्फ वही नकारात्मक खबर, जो आपको जानना जरूरी है… प्रखंड लोध ग्राम निवासी राकेश सोनवानी के घर पर लोटा पानी को लेकर हंसी-खुशी का माहौल बना हुआ था। घर में चहल-पहल के साथ वातावरण पूरी तरह खुशनुमा था। इसी दौरान जैसे ही दुर्घटना की सूचना मिली, पूरे घर और आसपास के माहौल में अचानक सन्नाटा और शोक छा गया। खुशियों से भरा वातावरण पल भर में ग़म और चिंता में बदल गया। राकेश सोनवानी के भाई ने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही परिवार को गहरा आघात पहुंचा। किसी को विश्वास नहीं हो रहा था कि इतनी बड़ी अनहोनी हो गई है। इसके साथ ही कई गंभीर रूप से घायल मरीजों का उपचार निजी अस्पताल कार्मेल हॉस्पिटल में भी कराया गया। यदि निजी चिकित्सकों और कार्मेल हॉस्पिटल की समय पर सहायता नहीं मिलती, तो मृतकों की संख्या बढ़ सकती थी । इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और चिकित्सकों की भारी अभाव को उजागर कर दिया है। समय रहते यदि सीएचसी में पर्याप्त संख्या में डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं की गई, तो भविष्य में आपातकालीन परिस्थितियों में हालात और भी भयावह हो सकते हैं। अस्पताल में भर्ती घायल। दुर्घटना के बाद मदद के लिए आगे आए लोग दुर्घटना के तुरंत बाद ओरसा ग्राम में मानवीय संवेदना और साहस का सराहनीय उदाहरण देखने को मिला। मुखिया अमृता देवी के नेतृत्व में ग्रामीणों ने बिना समय गंवाए राहत पहुंचाया । सलमान अहमद, रहमान अहमद, पप्पू यादव, रामप्रसाद यादव, संदीप प्रसाद, सतेन्द्र नगेसिया सहित अन्य युवकों ने तत्परता दिखाते हुए एंबुलेंस को सूचना दी। ग्रामीणों ने बस में फंसे घायलों को सुरक्षित बाहर निकाला और उन्हें एंबुलेंस के माध्यम से महुआडांड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। इधर घायलों के लिए विधायक रामचंद्र सिंह ने 40, जामा मस्जिद के सदर इमरान खान द्वारा 10 कंबल भेजवाया गया।


