गरीबी-बेरोजगारी के बीच उम्मीद की पाठशाला बना डाइट पेंड्रा:गरीब छात्रों के लिए प्राचार्य अपने पैसे से चलाते हैं कोचिंग, 300 बन चुके शिक्षक

छत्तीसगढ़ के पेंड्रा-गौरेला-मरवाही जिले में शिक्षा सिर्फ नौकरी का जरिया नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का माध्यम बन रही है। पेंड्रा स्थित डाइट (जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान) में गरीब और किसान परिवार के युवाओं को काबिल बनाने की एक मिसाल कायम की है डाइट के प्राचार्य जेपी पुष्प ने। उनके नेतृत्व में वर्ष 2023 से डाइट परिसर में निःशुल्क कोचिंग सेंटर संचालित हो रहा है, जिसने अब तक करीब 300 युवाओं को शिक्षक बनने की राह दिखाई है। खास बात ये है कि कोचिंग चलाने में जो खर्च आता है, इसमें प्राचार्य खुद अपना आधा वेतन देते हैं। इससे यहां पढ़ाने वाले 8 शिक्षकों को मानदेय मिलता है। अन्य खर्चे के लिए प्राचार्य के पुराने छात्र जो नौकरी पेशा हैं, वह मदद करते हैं। इसके लिए 450 छात्रों का वाट्सएप ग्रुप है। मूल रूप से जांजगीर चांपा जिले के जैजैपुर निवासी जेपी पुष्प पेंड्रा डाइट में 11 साल से हैं। प्राचार्य पुष्प खुद समय निकालकर कोचिंग में छात्रों को पढ़ाते हैं साथ ही यहां के कुछ व्याख्याता भी उनकी मदद करते हैं। कोचिंग सेंटर में छात्रों को नशे से दूर रहने की भी सलाह दी जाती है। कोचिंग सेंटर देखने कलेक्टर व अन्य प्रशासनिक अफसर भी आते हैं। प्राचार्य पुष्प को राज्यपाल सम्मानित कर चुके हैं। प्रतियोगी माहौल देखकर अभ्यर्थियों का कांफिडेंस बढ़ा
कोचिंग सेंटर की छात्रा प्रभा नामदेव शिक्षक भर्ती के लिए टेट की तैयारी कर रही हैं। उनका कहना है कि कई परिवारों में लड़कियों को बाहर पढ़ने भेजने को लेकर भी हिचक होती है। ऐसे में यह व्यवस्था उनके लिए वरदान साबित हो रही है। भूपसिंह का कहना है कि सबसे अच्छी बात यह है कि यहां किसी प्रकार की कोई फीस नहीं ली जाती, जिससे उन्हें पढ़ाई का पूरा लाभ मिल रहा है। बॉटनिकल गार्डन,दो सौ से अधिक प्रजाति के पौधे
प्राचार्य ने डाइट परिसर में अपने ही खर्च से​ मिनी बॉटनिकल गार्डन तैयार करवाया। यहां करीब दो 200 से अधिक प्रजाति के पौधे लगे हैं। रोज खुद ही इनकी देखरेख करते हैं। डाइट परिसर को भी ईसीसीई थीम पर साज-सज्जा किया गया है। वे कठपुतली नृत्य, संसाधनों की व्यवस्था, उल्लास कार्यक्रम का प्रचार-प्रसार भी करते हैं। फूलों से उन्हें काफी लगाव है। प्राचार्य जेपी पुष्प के अनुसार पीएससी व यूपीएससी की तैयारी में 7 साल लग जाते हैं। हमारा मकसद है कि पहले छात्रों की बेरोजगारी दूर हो। उन्हें नौकरी मिल जाए। यदि शिक्षक ही बन गए तो वे खुद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर लेंगे। प्राचार्य ने खुद के खर्च पर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए 400 से अधिक पुस्तकों की लाइब्रेरी बनाई है। डाइट की लाइब्रेरी की 13 हजार किताबों का भी कोचिंग के छात्र आकर उपयोग करते हैं।​ उन्होंने डाइट परिसर में अपने खर्च से​ मिनी बॉटनिकल गार्डन तैयार करवाया। करीब 200 प्रजाति के पौधे लगे हैं। अब जैजैपुर में नया सेंटर, नाम धरोहर
इससे पहले जेपी पुष्प जैजेपुर के प्राचार्य थे। अपने कार्यकाल में दो बार कक्षा 12वीं के विद्यार्थी टॉप-10 में स्थान बनाने में सफल हुए। इस विद्यालय से राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी भी प्राप्त हुए। सेना व प्रशासनिक सेवा के क्षेत्रों में भी विद्यालय से बड़ी संख्या में स्थान अर्जित किया है। यहां वे एक और कोचिंग सेंटर खोलने जा रहे हैं। इसके लिए धरोहर ग्रुप बनाया गया है। नहीं चाहता कोई पिता पढ़ाने के लिए जमीन बेचे: डाइट प्राचार्य जेपी पुष्प बताते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों के सपने भी शहर के बच्चों जैसे ही होते हैं, पर सुविधाओं के अभाव में वे अधूरे रह जाते हैं। वे कोचिंग के लिए रायपुर, बिलासपुर, भिलाई नहीं जा सकते। मैं नहीं चाहता कि कोई पिता अपने बच्चे को पढ़ाने के लिए अपनी जमीन बेचे, इसलिए हमने यह कोचिंग शुरू की है। इस ग्रुप का उद्देश्य व्यापमं, प्री-डीएड, प्री-बीएड, एएनएम, नर्सिंग, पटवारी, प्रयोगशाला परिचारक आदि प्रतियोगी परीक्षाओं की निशुल्क तैयारी कराना है।

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