दांपत्य में समझ से बनता है सुखी परिवार : प्रज्ञान सागर

भास्कर न्यूज | टोंक दांपत्य जीवन को संस्कार, समरसता और संयम से जोड़ने के संदेश के साथ रविवार को श्री दिगंबर जैन नसियां अमीर गंज टोंक में जैन दंपती सेमीनार हुआ। आचार्य विनिश्चय सागर महाराज के परम शिष्य मुनि प्रज्ञान सागर व मुनि प्रसिद्ध सागर महाराज के सानिध्य में सेमीनार हुआ। समाज के प्रवक्ता पवन कंटान और गुरु भक्त कमल सर्राफ ने बताया कि विधिवत शुरुआत चित्र अनावरण व दीप प्रज्वलन के साथ हुई। शास्त्र भेट और मंगलाचरण हुआ। सेमीनार में शामिल 120 दाम्पत्य जोड़े को मुनि प्रज्ञान सागर ने दांपत्य जीवन, पारिवारिक समरसता व संस्कारों पर कहा कि पति–पत्नी का संबंध केवल अधिकारों का नहीं, बल्कि कर्तव्यों, समर्पण और समझदारी का होता है। एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान, संवाद में मधुरता और परस्पर विश्वास ही सुखी गृहस्थ जीवन की नींव है। क्रोध, अहंकार और शंका को त्यागकर क्षमा, संयम और सहनशीलता को अपनाने से घर स्वर्ग बन सकता है। यह सेमीनार न केवल दांपत्य जीवन के लिए, बल्कि समग्र पारिवारिक और सामाजिक उत्थान के लिए अत्यंत प्रेरणादायक सिद्ध हुआ। आखिर में अध्यक्ष पदम चंद व मंत्री महावीर प्रसाद देवली ने सबका सम्मान किया। अनिल आंडरा, धर्मचंद पत्तलदोना, राजेश बोरदा, ज्ञानचंद दाखिया, ओम, कमल सर्राफ, राजेश शिवाडिया, डॉ चेतन जैन, राजकुमारी अत्तर, बीना जैन, अनीता जैन, अनिल सर्राफ, मनीष, जितेंद्र, पप्पू नमक, मनोज, अभिषेक बिलासपुरिया, रमेश काला, रमेश आदि उपस्थित रहे। मुनि ने विशेष रूप से सास-बहू के संबंधों पर कहा कि सास, बहू को बेटी समान और बहू को सास में मां का भाव देखना चाहिए। आलोचना की जगह सहयोग और आदेश के स्थान पर स्नेह, समझ विकसित करने से परिवार में सौहार्द रहता है। छोटी-छोटी बातों को तूल न देकर धैर्य और संवाद से समाधान निकालना चाहिए। मुनि प्रज्ञान सागर महाराज ने जैन दर्शन के मूल सिद्धांत-अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और अनेकांत को पारिवारिक जीवन में उतारने का आह्वान कर कहा कि इन्हें अपनाकर ही दंपती जीवन को शांत, सुसंस्कृत और धर्ममय बना सकते हैं। दंपतियों ने महाराज से अपनी शंकाओं का समाधान भी किया। आखिर में जैन दंपतियों ने मुनि के मार्गदर्शन को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।

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