रांची रांची यूनिवर्सिटी शिक्षा के इंफ्रास्ट्रक्चर में अब तक का सबसे बड़ा कदम उठाने जा रही है। विश्वविद्यालय के अधीन आरएलएसवाई कॉलेज में G+10 यानी 10 मंजिला अत्याधुनिक अकादमिक भवन के निर्माण का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। इस मेगा प्रोजेक्ट पर 143 करोड़ रुपए खर्च होंगे। नई बिल्डिंग को 10 हजार छात्रों की क्षमता को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है, जबकि वर्तमान में कॉलेज में करीब 7000 छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। यह भवन नई शिक्षा नीति (एनईपी) और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप होगा। 15 दिन पहले प्रधान सचिव राहुल पुरवार ने कॉलेज का निरीक्षण किया था और कुलपति प्रोफेसर धर्मेंद्र कुमार सिंह, प्रिंसिपल डॉ विष्णु चरण महतो, सीसीडीसी डॉ प्रकाश कुमार झा समेत अन्य अधिकारियों से बात कर 15 दिन में प्रस्ताव भेजने के लिए कहा था। प्रिंसिपल ने अन्य तकनीकी अधिकारियों ने 2 दिन पहले प्रस्ताव तैयार कर लिया है। ग्राउंड फ्लोर : प्रवेश, प्रशासनिक कार्यालय, एडमिशन-रजिस्ट्रेशन काउंटर, दिव्यांग-अनुकूल सुविधाएं और सुरक्षा कक्ष। पहला फ्लोर : स्मार्ट क्लासरूम-डिजिटल बोर्ड, प्रोजेक्टर और हाइब्रिड क्लास की सुविधा मिलेगी। दूसरा फ्लोर : फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी सब्जेक्ट के लिए अत्याधुनिक लैब, सेफ्टी-स्टैंडर्ड के अनुसार दूसरे फ्लोर की होगी डिजाइन। छात्रों को इस फ्लोर पर अन्य कई सुविधाएं मिलेंगी। तीसरा फ्लोर : कंप्यूटर और आईटी लैब-कोडिंग, डेटा और एआई से जुड़े कोर्स के लिए यहां स्पेस होगा। चौथा फ्लोर : ह्यूमैनिटीज और सोशल साइंस विभाग के लिए अलग से फ्लोर होगा। डिस्कशन और सेमिनार रूम भी। पांचवां फ्लोर : डिजिटल लाइब्रेरी और नॉलेज सेंटर-ई-बुक, ई-जर्नल व स्टडी जोन। छठा फ्लोर : पोस्ट ग्रेजुएट छात्रों के लिए छठे फ्लोर में क्लासरूम और रिसर्च सेक्शन, थीसिस और प्रोजेक्ट वर्क स्पेस भी मिलेगा। कॉलेज की नई बिल्डिंग के सातवें फ्लोर पर सेमिनार और कॉन्फ्रेंस हॉल होगा। इसी फ्लोर पर छात्रों के लिए इनोवेशन और स्टार्ट-अप सेल भी बनाया जाएगा। आठवें फ्लोर पर वोकेशनल और स्किल डेवलपमेंट सेंटर, इंडस्ट्री-एकेडेमिया इंटरफेस बनाएं जाएंगे। नौवें फ्लोर पर फैकल्टी डेवलपमेंट और ट्रेनिंग सेंटर तथा ऑनलाइन टीचिंग स्टूडियो होगा। दसवें फ्लोर पर मल्टीपर्पज हॉल होगा। यहां अकादमिक परिषद की बैठकें और भविष्य के लिए स्पेस बनाया जाएगा। नई बिल्डिंग को मल्टी-डिसिप्लिनरी एजुकेशन, रिसर्च, स्किल डेवलपमेंट और डिजिटल लर्निंग को केंद्र में रखकर डिजाइन किया गया है। यूनिवर्सिटी का दावा है कि इससे छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ रोजगार से जुड़ी स्किल भी मिल सकेगी।


