जैसलमेर में 22-23 जनवरी को बारिश के आसार:पारा 3 डिग्री लुढ़का, मजबूत पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से बदलेगा मिजाज

जैसलमेर शहर और सीमावर्ती इलाकों में मौसम के मिजाज में अचानक आए बदलाव ने ठिठुरन बढ़ा दी है। पिछले कुछ दिनों से तेज धूप के कारण मिल रही राहत पर बादलों ने पानी फेर दिया है। एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ के असर से रविवार को दिन भर बादलों की आवाजाही रही, जिससे अधिकतम तापमान में 3 डिग्री सेल्सियस की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। वहीं सोमवार को भी अलसुबह सर्द हवाओं ने लोगों को सताया। सूरज निकलने के बाद लोगों को हलकी राहत मिली। मौसम विभाग के अनुसार, अभी यह केवल शुरुआत है। आगामी 22 और 23 जनवरी को जिले में मेघगर्जन के साथ हल्की बारिश की प्रबल संभावना है। बादलों की लुकाछिपी रही जिले में रविवार सुबह की शुरुआत हल्के कोहरे के साथ हुई। हालांकि दिन चढ़ने के साथ कोहरा छंट गया, लेकिन आसमान में बादलों के डेरे के कारण सूर्यदेव के दर्शन दुर्लभ रहे। दिन भर सूरज और बादलों के बीच लुका-छिपी का खेल चलता रहा, जिससे धूप का असर पूरी तरह खत्म रहा। शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक चली सर्द हवाओं ने वातावरण में सिहरन पैदा कर दी, जिससे लोग एक बार फिर गर्म कपड़ों में लिपटे नजर आए। उसका असर सोमवार को भी देखने को मिला। सर्द हवाओं से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। दिन और रात दोनों के तापमान में गिरावट मौसम केंद्र के आंकड़ों के अनुसार, रविवार को जैसलमेर का अधिकतम तापमान 24.3 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो कि शनिवार (27.3 डिग्री) के मुकाबले 3 डिग्री कम है। वहीं, न्यूनतम तापमान में भी 1 डिग्री की मामूली गिरावट के साथ पारा 10.2 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। हालांकि, वर्तमान तापमान अब भी सामान्य से करीब 1.1 से 1.4 डिग्री अधिक बना हुआ है, लेकिन बादलों के कारण ठंड का एहसास तीखा हो गया है। 22 जनवरी से ‘मजबूत’ सिस्टम देगा दस्तक कृषि मौसम वैज्ञानिक अतुल गालव ने बताया कि वर्तमान में सक्रिय विक्षोभ कमजोर है, लेकिन 22 जनवरी को एक ‘मजबूत’ पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा। इस सिस्टम का असर जैसलमेर सहित जोधपुर और बीकानेर संभाग के जिलों में व्यापक रूप से देखने को मिलेगा। 22 व 23 जनवरी को जैसलमेर के कई हिस्सों में बादल गरजने और आकाशीय बिजली चमकने की चेतावनी दी गई है। विक्षोभ के प्रभाव से जिले में हल्की से मध्यम दर्जे की मावठ गिर सकती है। यह बारिश रबी की फसलों, विशेषकर गेहूं और चने के लिए अमृत मानी जा रही है, लेकिन जीरे की फसल वाले किसानों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

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