गौवंशों के लिए चारागाह अतिक्रमण मुक्त करवाएगी सरकार:राजस्थान में शुरू होगी गांव ग्वाल योजना, गौवंशों को चराने के लिए नियुक्त होगा व्यक्ति

प्रदेश में अब जल्द गांव ग्वाल योजना शुरू होगी। इस योजना के तहत गांवों में एक व्यक्ति को चिन्हित कर नियुक्त किया जाएगा कि गांव के गौवंशों को चारागाह भूमि पर ले जाकर चराए और शाम को वापस उन्हें उनके मालिकों तक ले आए। इसके लिए चारागाह भूमियों का होना भी जरूरी है, ऐसे में जहां जहां चारागाह की जमीनों पर कब्जे हैं, अतिक्रमण है उन्हें हटाने के लिए भी राजस्थान में अभियान चलेगा। पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने बताया कि आज के समय चारागाह की जमीनों पर अतिक्रमण हो चुके है। लोग अपने गौवंशों को चारागाह भूमि पर चराने के लिए नहीं ले जाते हैं, ऐसे में लोगों ने इन जमीनों पर कब्जे कर लिए। लेकिन अब राजस्थान में अभियान चलाकर सख्ती की जाएगी। कानून में जो अधिकार दिए गए हैं उसके अनुसार सख्ती कर चारागाह भूमि को मुक्त करवाएंगे। इसके तहत पहले बड़ी जगह पर अतिक्रमण करने वाले लोगों को नोटिस दिए जाएंगे। अगर वे समझदारी से खुद चारागाह की जमीन छोड़ देते हैं तो ठीक है नहीं तो कानूनी एक्शन लिया जाएगा। मंत्री दिलावर ने बताया कि प्रदेश भर में दो सौ ऐसे लोगों को चिन्हित किया गया है जिन्होंने सौ-दौ सौ बीघा जमीन पर कब्जे किए हैं। उम्मीद हैं कि ये खुद गौवंशों के लिए चारागाह की जमीन छोड़ देंगे नहीं तो कानून अपना काम करेगा। उन्होंने बताया कि अतिक्रमण के अलावा जमीनों में जंगली बबूल भी काफी परेशानी का सबब है। इसे भी जड़ मूल से खत्म करना है। शुरू होगी गांव ग्वाल योजना
दिलावर ने बताया कि विशेषज्ञों एवं अनुभवी गोवंश पलकों से चर्चा कर प्राचीन परंपरा गांव ग्वाल को फिर से शुरू करने की योजना पर काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आजादी से पूर्व तक बल्कि यह कहे की वर्तमान सें दो-तीन दशक पूर्व तक पूरे भारत में ग्रामीण अंचल में यह परंपरा प्रचलन में थी। गांव की सभी गोवंश को गांव का ही व्यक्ति एक साथ ले जाता था और दिन भर गायों को चरा कर शाम में वापस गांव मे ले आता था। इस काम के बदले गौपालक उस गाय चराने ले जाने वाले को गेहूं दिया करते थे। ग्रामीण अंचलों में यह व्यवस्था समाप्त हो गई। अब लोग गौवंशों को खुला छोड़ देते हैं। जिससे सड़को पर हादसे भी होते है। इस योजना में प्रत्येक गांव में एक व्यक्ति नियुक्त किया जाएगा जो प्रतिदिन सुबह गांव की सभी गायों को एकत्रित करेगा और उन्हें चराने के लिए चारागाह भूमि पर लेकर जाएगा। शाम को उन्हें लाकर वापस गांव मे छोड़ेगा। इस काम के बदले सभी गोपालक उस गांव ग्वाल को हर माह धनराशि भी देंगे जिससे उसके परिवार का लालन-पालन अच्छे से हो सकेगा और उसके लिए यह काम रोजगार का साधन बन जाएगा! पॉलिथीन और प्लास्टिक से गायों की मौत
वर्तमान समय में सिंगल यूज़ पॉलीथिन और प्लास्टिक के बने डिस्पोजल आइटम जो शादी समारोह में सामान्य रूप सें उपयोग किए जाते हैं। वह गायों की अकाल मृत्यु का बड़ा कारण बनते हैं। हम देखते हैं कि गांव – शहरों में हमारे आसपास सभी जगह बड़ी संख्या में पॉलिथीन बिखरी पड़ी रहती है और जहां शादी समारोह आयोजित होते हैं वहां प्लास्टिक के डिस्पोजल आइटम के ढेर लगे होते हैं। जिनमें बचे हुए भोजन की झूठन लगी होती है। गाय भोजन के चक्कर में इन प्लास्टिक के बने डिस्पोजल आइटमों और पॉलिथीन को खा जाती है, जो गाय के पेट में जाकर जमा हो जाती है। क्योंकि पॉलिथीन गलता नहीं है तो वह गाय के पेट में इकट्ठा होता रहता है जिससे उसकी आंत खराब हो जाती है और उसकी मौत हो जाती है।

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