हिमाचल के शिमला जिले के रामपुर उपमंडल के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति लगातार बिगड़ रही है।उपमंडल के ग्रामीण क्षेत्रों में चरमराती स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर राजनीति गरमा गई है। पूर्व भाजपा प्रत्याशी कौल सिंह ने प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग को आड़े हाथों लेते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय उच्चमार्ग-5 पर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) ज्यूरी पिछले चार महीनों से बिना डॉक्टर के चल रहा है, जिससे क्षेत्र की लगभग 18 पंचायतों की जनता को इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। इलाज न मिलने से लोगों को परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं लोगों के लिए जान लेवा हो रही है। इलाज न मिलने से एक जली हुई महिला की मौत हो चुकी है। जब स्वास्थ्य सेवा ही बदहाल तो नंबर वन का क्या मतलब भाजपा नेता ने मुख्यमंत्री के हिमाचल को स्वास्थ्य सेवाओं में नंबर वन बनाने के दावे पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं होंगी, तो नंबर वन बनने की बात कैसे सार्थक हो सकती है। उन्होंने सरकार से मांग की कि पीएचसी ज्यूरी में डॉक्टर की प्रतिनियुक्ति तुरंत समाप्त कर उन्हें वापस तैनात किया जाए, साथ ही सभी खाली पदों को शीघ्र भरा जाए, ताकि ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। भाजपा नेता ने खोली स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल— बड़ा खुलासा- वेतन कहीं से सेवाएं कहीं और कौल सिंह के अनुसार, करीब छह माह पहले पीएचसी ज्यूरी में एक डॉक्टर की तैनाती की गई थी। यहां तैनात डॉक्टर पिछले चार महीनों से ऊना में प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) पर सेवाएं दे रहे हैं, जबकि उनका वेतन ज्यूरी केंद्र से निकल रहा है। उन्होंने कहा कि इस “मिस-मैनेजमेंट” के कारण ग्रामीणों को मामूली इलाज के लिए भी भारी खर्च कर रामपुर के खनेरी अस्पताल जाना पड़ता है। नर्स और फार्मासिस्ट तक नहीं उन्होंने यह भी बताया कि पीएचसी ज्यूरी में न तो डेंटल चेयर उपलब्ध है, न नर्स और न ही फार्मासिस्ट। पूरे स्टाफ की कमी के चलते स्वास्थ्य सेवाएं लगभग ठप हो चुकी हैं। जबकि सरकार दावा कर रही है कि वह स्वास्थ्य और शिक्षा में सुधार के लिए बड़े कदम उठा रही है। लेकिन इनके दावे की पोल सरकारी अस्पताल ही खोल रहे हैं। इलाज न मिलने से एक महिला की मौत हो चुकी है 12/20 क्षेत्र की एक महिला की जलने से हुई दुखद मृत्यु का हवाला देते हुए कौल सिंह ने कहा कि देवठी पीएचसी और तकलेच सीएचसी में डॉक्टरों की कमी के कारण उसे समय पर प्राथमिक उपचार नहीं मिल सका। उन्होंने मुख्यमंत्री के ‘नंबर वन स्वास्थ्य सेवाओं’ के दावे पर सवाल उठाते हुए मांग की है कि ज्यूरी में डॉक्टर की प्रतिनियुक्ति तुरंत रद्द की जाए और सभी खाली पदों को भरा जाए, अन्यथा जनता की नाराजगी सरकार पर भारी पड़ेगी।
जानिए- स्वास्थ्य समस्या और इंपैक्ट


