सवाई माधोपुर के अमरूद फेस्टिवल में बिना बीज वाला फल:इससे कैंडी, चाय और वाइन बनाई जा रही; पल्प बिजनेस के लिए 20 हजार की मशीन

सवाई माधोपुर में अमरूद फेस्टिवल का दूसरा दिन रहा। जिसमें देश भर के 10 हजार किसानों ने हिस्सा लिया‌। इसी के साथ ही यहां पर देश के नामी गिरामी नर्सरी और कृषि वैज्ञानिकों ने भी शिरकत की। यहां देश के विभिन्न कोनों से आई नर्सरियों ने शानदार अमरूदों की किस्म का प्रदर्शन किया।‌ इस दौरान यहां पर करीब अमरूद की 30 किस्म का प्रदर्शन किया गया। इसमें सबसे महत्वपूर्ण रेड डायमंड रही। रेड डायमंड अमरूद कि वह किस में जिसमें अमरूद अंदर से लाल नजर आता है। इस अमरूद में बीज नहीं होने के चलते यह अमरूद महोत्सव के दौरान खासा लोकप्रिय रहा। इस अमरूद की दूसरी बड़ी खासियत यह है कि इस गूदा अन्य किस्म के अमरूदों से साॅफ्ट होता है। बिना बीज वाले लाल अमरूद की सेल्फ लाइफ दस दिन गुजरात से आए गुजरात से आए अनिल बताते हैं कि उनकी जारवी नर्सरी ने जारवी रेड और जारी रेड वन किस्म को पेटेंट करवाया गया। इस किस्म का अमरूद अंदर से पूरा लाल होता है और इस किस्म का फल अन्य अमरूदों से ज्यादा स्वादिष्ट है। इस बीज नहीं है और इसका गूदा बहुत ही साफ्ट होता है। इस किस्म के अमरूद की सेल्फ लाइफ भी अन्य अमरूदों की तुलना में ज्यादा होती है। इस किस्म का फल अन्य अमरूद की तुलना में ज्यादा दिन तक खराब नहीं होता है। इसकी सेल्फ लाइफ सामान्य तापमान में 8-10 दिन तक होती है। जिसके चलते यह खासा लोकप्रिय है। अमरूद से बने रहे हैं दस उत्पाद अबोहर पंजाब से आए कृषि वैज्ञानिकों ने अपने उत्पादों की थी जानकारी डॉ रमेश कुमार ने बताया वह सीफेट अबोहर पंजाब से आए हैं। उन्होंने बताया अमरूद से दस उत्पाद बनाए जा रहे हैं। उन्होंने संस्थान की ओर से फल और सब्जी का भंडारण और प्रोसेसिंग पर काम किया जा रहा है‌। उनके संस्थान की ओर से अमरूद से दस उत्पाद बनाए जा रहे हैं। अमरूद ग्वावा लैदर, ग्वावा बार, ग्वावा जैली, ग्वावा जैली, ग्वावा टी, ग्वावा कैंडी, डिहाइड्रेट रिंग, मारबिलिड, हाजमोला, ज्यूस, स्क्वैश, वाइन बनाई जा रही है। इसके लिए उनका संस्थान किसानों को प्रोसेसिंग यूनिट बनाने के लिए ट्रेनिंग भी दी जा रही है। ट्रेनिंग के दौरान वह किसानों को भंडारण और प्रोसेसिंग किस तरह की जाती है, यह सिखाया जाता है। उन्होंने बताया किसान छोटे स्तर पर पल्प लेकर बिजनेस स्टार्ट कर सकते हैं। इसके लिए बीस हजार रुपए की मशीन खरीदी जा सकती है। किसान कंपनियों से संपर्क पल्प निकालकर अपनी आय को बढ़ा सकते हैं।

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