धौलपुर में प्रस्तावित ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे परियोजना को लेकर ग्रामीणों में चिंता व्याप्त है। इस परियोजना के तहत क्षेत्र के कई गांवों की कृषि भूमि अधिगृहीत की जा रही है। ग्रामीण अपनी अधिगृहीत भूमि के बदले उचित मुआवजे की मांग को लेकर जिला प्रशासन से मिले हैं। सोमवार को हथवारी, ढाढ़े का पूरा, गन्दगी, मछरिया और हनुमानपुरा सहित आसपास के कई गांवों के सैकड़ों ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने जिला कलेक्टर श्रीनिधि बीटी से मुलाकात कर उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में ग्रामीणों ने बताया कि ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे परियोजना में उनकी उपजाऊ कृषि भूमि अवाप्त की जा रही है, जो उनकी आजीविका का मुख्य साधन है। उनका कहना है कि यदि मुआवजा उचित और बाजार दर के अनुरूप नहीं मिला, तो उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि वर्तमान में प्रस्तावित मुआवजा दरें जमीन की वास्तविक कीमत और भविष्य में होने वाले नुकसान की भरपाई करने में अपर्याप्त हैं। उन्होंने मुआवजे की राशि बढ़ाने के साथ-साथ प्रभावित किसानों को पुनर्वास और रोजगार से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी मांग की। इस दौरान अधिवक्ता अनिल शर्मा और प्रशांत शर्मा भी ग्रामीणों के साथ मौजूद रहे। उन्होंने प्रशासन के समक्ष कानूनी पहलुओं को रखते हुए कहा कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में किसानों के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए और उन्हें न्यायसंगत मुआवजा मिलना उनका अधिकार है। ग्रामीणों की बात सुनने के बाद जिला कलेक्टर श्रीनिधि बीटी ने उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। कलेक्टर ने कहा कि मुआवजे की दरों की समीक्षा कर आवश्यक होने पर उसमें बढ़ोतरी के लिए संबंधित विभागों को प्रस्ताव भेजा जाएगा, ताकि किसानों के साथ न्याय हो सके। कलेक्टर के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने संतोष व्यक्त किया। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक लिखित और ठोस निर्णय नहीं आता, तब तक वे अपनी मांगों को लेकर सतर्क रहेंगे।


