चंडीगढ़ की कोर्ट ने दंपती के 5 छोटे बच्चों को देखते हुए उन्हें जेल भेजने की जगह रिहा कर दिया। दंपती पर अपनी नवजन्मी बच्ची की मौत के बाद झाड़ियों में फेंकने का आरोप था। कोर्ट में पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की तो दंपती ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। जब कोर्ट ने दंपती के हालात जाने तो आदेश दिया कि न्याय के हित में उन्हें जेल भेजने की जगह रिहा करना उचित होगा। कोर्ट ने उन्हें 6 महीने के प्रोबेशन पर छोड़ दिया। हालांकि इस दौरान सजा भुगतने के लिए बुलाए जाने पर उन्हें हाजिर होने का आदेश दिया गया। इस दौरान प्रोबेशन अधिकारी उनकी निगरानी करेंगे। रिहा करते हुए कोर्ट ने कहा… आरोपियों के पास देखभाल के लिए छोटे बच्चे हैं और यदि उन्हें जेल भेजा गया, तो उनके बच्चों की देखभाल करने वाला कोई नहीं रहेगा। इन परिस्थितियों को देखते हुए, मेरी सुविचारित राय में, न्याय के हित में आरोपियों को प्रोबेशन पर रिहा किया जाना उचित है। नवजन्मी बच्ची की मौत छिपाने को फेंका
पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक सेक्टर 3 की पुलिस ने 9 सितंबर 2025 को रुना देवी व उसके पति अरविंद मुखिया को गिरफ्तार किया था। उन पर आरोप है कि उनकी नवजन्मी बच्ची की मौत हो चुकी थी। इसके बाद उन्होंने उसका जन्म और मौत छुपाने के इरादे से उसे गुपचुप सेक्टर 9 स्थित हेयर मास्टर्स के पास झाड़ियों में फेंक दिया। इस मामले में पुलिस ने उनके खिलाफ केस दर्ज किया था। कोर्ट में खुद ही गुनाह कबूल कर लिया
इस मामले में पुलिस ने चंडीगढ़ कोर्ट में चार्जशीट दायर की। जिसमें कोर्ट ने उन्हें भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 94 एवं 3(5) के तहत कसूरवार माना। जब दंपती को कोर्ट में लाया गया तो उन्होंने किसी भी तरह की जांच या टेस्ट करवाने से इनकार कर दिया। उन्होंने खुद ही अपना गुनाह कबूल कर लिया। कोर्ट ने पाया कि दंपती ने अपनी मर्जी से पूरी तरह समझकर गुनाह कबूल किया है। दंपती झुग्गी में रहते, बच्चों की देखभाल वाला कोई नहीं
इस मामले में कोर्ट को पता चला कि दंपती रुना और अरविंद न्यू चंडीगढ़ में झुग्गी में रहते हैं। दोनों ही मजदूरी करते हैं। अगर दोनों को जेल भेज दिया जाएगा तो फिर उनके बच्चों की देखभाल करने वाला कोई नहीं है। इसके बाद कोर्ट ने कहा कि न्याय के हित में आरोपियों को प्रोबेशन पर रिहा किया जाना उचित है। अच्छा व्यवहार और शांति से रहना होगा
कोर्ट ने कहा कि उन्हें जेल भेजने के बजाय 10 हजार रुपए के प्रोबेशन बॉन्ड जमा कराए जाएं। उन्हें 6 महीने के लिए प्रोबेशन पर रिहा किया जा रहा है। मगर, उन्हें अगले 6 महीने तक अच्छा व्यवहार रखना होगा। उन्हें शांति से रहना होगा। इस दौरान प्रोबेशन अधिकारी उनकी निगरानी करते रहेंगे। चंडीगढ़ कोर्ट के ऑर्डर की कॉपी पढ़ें…


