सांस फूलना और तेज धड़कन था हार्ट का दुर्लभ ट्यूमर:​​​​​​​6 माह तक महिला को मिला गलत इलाज; भोपाल में कार्डिक साइंसेज एक्सपर्ट ने बचाई जान

रात में पसीना आना, सांस फूलना और तेज धड़कन से परेशान महिला को 6 माह तक गलत इलाज मिला। जिससे उसकी स्थिति बिगड़ती गई। तबीयत ज्यादा खराब होने पर परिजन 40 वर्षीय महिला को लेकर भोपाल के सागर मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल (SMH) पहुंचे। जहां कार्डियक साइंसेज और मल्टीडिस्पिलनरी टीम ने महिला की जांच की। जिसमें सामने आया कि पीड़िता के दिल में बेहद दुर्लभ मायक्सोमा ट्यूमर है। अस्पताल के डॉक्टरों की टीम ने 6 घंटे की सर्जरी कर ट्यूमर निकाला, जिससे महिला की जान बच सकी। डॉक्टरों के अनुसार, ट्यूमर महिला के दिल के ह्रदय के बाएं चैंबर में था। जिसने सर्जरी को बेहद मुश्किल बना दिया था। दुर्लभ हृदय ट्यूमर का पहला मामला
हृदय में मायक्सोमा ट्यूमर के केस प्रति दस लाख आबादी में एक से भी कम दर्ज होती है। यह ट्यूमर अक्सर गैर-कैंसर होता है, लेकिन अपनी लोकेशन और आकार के कारण मरीज की जान के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। इसी प्रकार का ट्यूमर 40 वर्षीय महिला के बाएं हृदय-चैंबर में पाया गया, जो 6 सेंटी मीटर लंबा और 5 सेंटी मीटर चौड़ा था। लंबे समय तक डॉक्टर मानते रहे न्यूरोलॉजिकल बीमारी
यह महिला पिछले छह महीनों से दूसरे अस्पताल में कमजोरी के इलाज के लिए जा रही थी। उसके शरीर के बाएं हिस्से में कमजोरी के लक्षण दिखाई देते थे, जबकि डॉक्टर उसे सामान्य न्यूरोलॉजिकल दवाएं दे रहे थे। बावजूद इसके महिला को राहत नहीं मिली, बल्कि उसकी स्थिति बिगड़ती चली गई। महिला जब SMH पहुंची तो उसे कई गंभीर शिकायतें थीं। जिसमें बीपी में अचानक गिरावट, सांस फूलना, सीने में दर्द, तेज धड़कन, चक्कर आना, रात में पसीना और लगातार थकान जैसे लक्षण शामिल थी। SMH के कंसलटेंट इंटरनल मेडिसिन डॉ. अंकित तिवारी ने तुरंत उसे अस्पताल में भर्ती कर जांचें शुरू कराईं। देर होती तो अंदर ही ट्यूमर टूट जाता
इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. महेश शर्मा ने महिला के हृदय में मौजूद मायक्सोमा ट्यूमर का पता लगाया। यह ट्यूमर हृदय के बाएं चैंबर में था और लगातार रक्त प्रवाह को बाधित कर रहा था, जो उसके सभी लक्षणों की जड़ था। डॉ. शर्मा के अनुसार, अगर यह ट्यूमर टूटकर अलग हो जाता, तो मरीज को स्ट्रोक और अचानक मौत जैसी स्थिति भी उत्पन्न हो सकती थी। अंग खराब होने का था खतरा
हृदय के ट्यूमर के कारण ब्लड सर्कुलेशन बाधित हो रहा था। जिससे शरीर के अलग-अलग हिस्सों में खून की सप्लाई अनियमित होने से अन्य दुष्प्रभाव भी सामने आए। जांच में टीम ने पाया कि महिला का रक्तचाप लगातार अस्थिर था। ब्रेन की कोशिकाएं भी प्रभावित हो रही थी। मरीज को हेमोडायनामिक अस्थिरता थी। यही कारण था कि न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. मनीष शाक्या, न्यूरो सर्जन डॉ. निशांत शुक्ला ने जोखिम समझाते हुए परिवार को काउंसिलिंग दी और निरंतर मॉनिटरिंग की। इस बीच महिला में गंभीर किडनी इंजरी भी पाई गई, जिसका प्रबंधन नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. अजय झा और गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. रघुवीर चंद्र ने किया। ऑपरेशन से पहले एक सप्ताह तक मेडिकल स्टेबलाइजेशन
डॉ. रघुवीर ने बताया कि इतने गंभीर ट्यूमर वाले मरीज को सीधे ऑपरेट करना जोखिम भरा होता है। इसलिए डॉ. महेश एस. कुर्वे (क्रिटिकल केयर एवं एनेस्थीसिया) और डॉ. ब्रजेश कौशल (कार्डियक एनेस्थीसिया) ने मरीज को एक सप्ताह तक ICU में लक्षित उपचार देकर स्थिर किया। टीम ने अंगों की स्थिति और संभावित जटिलताओं पर संयुक्त चर्चा की और परिवार से उच्च जोखिम सहमति के बाद ऑपरेशन का निर्णय लिया गया। 6 घंटे चली जटिल सर्जरी सर्जरी SMH के कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी कंसल्टेंट डॉ. संजीव गुप्ता ने की। ऑपरेशन 6 घंटे से अधिक चला, जिसमें कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, गैस्ट्रोलॉजी, क्रिटिकल केयर और कार्डियक एनेस्थीसिया विभागों के एक्सपर्ट ने मरीज की स्थिति संभालने में संयुक्त भूमिका निभाई। ट्यूमर को बिना टूटे निकालना सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा था, ऐसा होने से स्ट्रोक और मृत्यु का खतरा बढ़ जाता। सर्जरी के बाद महिला को हृदय विभागीय ICU (CCCU) में रखा गया। पांचवें दिन उसने चलना शुरू कर दिया और एक सप्ताह बाद उसे छुट्टी दे दी गई। डॉ. संजीव गुप्ता ने बताया कि हृदय के बाएं चैंबर में मायक्सोमा का पाया जाना अत्यंत दुर्लभ है। ट्यूमर का आकार तर्जनी उंगली के बराबर था और यह हृदय व रक्त वाहिकाओं पर दबाव डाल रहा था। टीम ने संयम से इसे सुरक्षित निकाला।

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