महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार की ओर से अजमेर दरगाह में शिव मंदिर होने का दावा किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के वकील डॉ.एपी सिंह के जरिए कोर्ट में याचिका लगाई गई। इसे सोमवार को सुनवाई करते हुए स्वीकार कर लिया। वकील डॉ एपी सिंह के अनुसार न्यायालय ने राजवर्धन सिंह परमार द्वारा 2022 में राष्ट्रपति को लगाई गई याचिका का जिक्र करते हुए परमार को प्रथम याचिका माना है। न्यायालय ने सभी पक्षकारों को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई 21 फरवरी रखी है। सुप्रीम कोर्ट के वकील डॉ.एपी सिंह ने बताया कि महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार की ओर से अजमेर की सिविल कोर्ट में याचिका पेश की गई। याचिका में अजमेर दरगाह के अंदर शिव मंदिर होने का दावा किया गया। कोर्ट ने सुनवाई करते हुए याचिका को स्वीकार कर लिया है। न्यायालय ने राजवर्धन सिंह को प्रथम पक्षकार माना अधिवक्ता ने बताया कि राजवर्धन सिंह की ओर से 2022 में राष्ट्रपति को याचिका लगाई थी। जो की सबसे पहले लगाई गई याचिका है। दरगाह के अंदर महादेव का शिवलिंग है। प्राचीन काल में वहां पर पूजा होती थी। याचिका को स्वीकार करना पूरे देश के सनातन धर्म की जीत है। न्यायालय में सवा लाख लोगों के एफिडेविट पेश किए गए हैं। जिसमें राजस्थान में 7800 किलोमीटर की यात्रा कर दरगाह की स्थिति के बारे में पूछा था। इसमें सभी ने मंदिर का जिक्र किया था। इसमें राजस्थान सरकार, आर्कियोलॉजी डिपार्टमेंट, दरगाह कमेटी को पार्टी बनाया है। न्यायालय ने 21 फरवरी को अगली सुनवाई रखी है। सभी को नोटिस भी जारी किए जा चुके हैं। इसमें खास बात यह रही कि न्यायालय ने वादी राजवर्धन सिंह को प्रथम पक्ष माना है। क्योंकि इस मामले में राजवर्धन सिंह की ओर से 2022 में ही राष्ट्रपति के नाम याचिका लगा रखी थी। जिसे न्यायालय में पेश किया था। 40 वर्षों से बंद मंदिर जल्द खुलेगा महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार ने बताया कि न्यायालय ने हमारे द्वारा 2022 में राष्ट्रपति को लगाई गई याचिका का जिक्र करते हुए हमें मुख्य पक्षकार माना है। इसे लेकर हम कोर्ट का आभार प्रकट करते हैं। राजस्थान में महाराणा प्रताप सेना की ओर से यात्रा की गई थी। जिसमें लाखों लोगों के हस्ताक्षर से याचिका लगाने का अवसर मिला था। आज उन सभी का बल हमें मिला है। अगली सुनवाई 21 फरवरी को दी गई है। हमें पूर्ण विश्वास है कि अजमेर दरगाह के नीचे 40 वर्षों से भगवान शिव का मंदिर बंद है, वह बहुत जल्द खुलेगा। वहां पूजा होगी और पुष्कर से जल भी लाकर चढ़ाया जाएगा। परमार ने कहा कि हमने याचिका में वहां के नक्शे, रेकी और शिवलिंग के चित्र सहित अन्य सबूत पेश किए हैं। इसके अलावा भी अगर न्यायालय कोई सबूत मांगेगा तो उन्हें पूरा करने का काम महाराणा प्रताप करेगी। पहली याचिका हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने लगा रखी अजमेर दरगाह में शिव मंदिर के दावे की पहली याचिका 27 नवंबर 2024 को हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता की ओर से भी अजमेर कोर्ट में याचिका लगाई थी। विष्णु गुप्ता ने दरगाह में संकट मोचन महादेव मंदिर होने का दावा किया था। न्यायालय ने याचिका को स्वीकार करते दरगाह कमेटी समेत तीन पक्षकारों को नोटिस जारी किए थे। इस मामले में लंबे समय से कोर्ट में सुनवाई जारी है। विष्णु गुप्ता की याचिका पर भी 21 फरवरी को सुनवाई रखी गई है। इसमें दरगाह कमेटी की ओर से 7/11 की एक एप्लीकेशन लगाई गई है। इस एप्लीकेशन पर 21 फरवरी को सुनवाई होगी। दरगाह में शिव मंदिर के दावे को लेकर हुई सुनवाई को लेकर पढें ये खबरें भी….


