जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) का आज आखिरी दिन है। दिन की शुरुआत मॉर्निंग म्यूजिक से हुई। इसमें नवाब खान और द मंत्रा बैंड ने परफॉर्म किया। युवा पीढ़ी और समाज पर केंद्रित सेशन ‘Gen-Z, मिलेनियल्स और मम्मीजी’ में बदलते सामाजिक व्यवहार और सोच पर चर्चा की गई। वहीं, जेएलएफ प्रोड्यूसर संजोय रॉय ने अगले साल की डेट्स की घोषणा की। अगले साल यह होटल क्लार्क्स आमेर में 14 जनवरी से 18 जनवरी तक होगा। चारबाग में हुए जेन Z, मिलेनियल्स और मम्मीजी सेशन में संतोष देसाई ने कहा कि मुझे लगता है, भारत महाशक्तियों में से एक है। परिवर्तन का विरोध करने की उसकी क्षमता है। मुझे लगता है कि भारतीय समाज ने खुद को इस तरह से निर्मित किया है कि वह प्रगति तो चाहता है, लेकिन परिवर्तन नहीं चाहता। रिया चोपड़ा ने कहा कि हमारी पीढ़ी, खासकर मिलेनियल्स स्थायी रूप से एक ऐसी स्थिति में जी रही है, जिसे परमाक्राइसिस ( स्थाई समस्या ) कहा जाता है, जिसका मतलब है कि दुनिया हम पर एक के बाद एक संकट थोप रही है। जिन्हें जनरेशन Z की क्रांति कहा गया है, मुझे ये पसंद हैं। अगर आप पूछ रहे हैं कि मैं इन्हें व्यक्तिगत रूप से कैसे देखती हूं, तो मुझे लगता है कि यह उन प्रणालियों के खिलाफ एक पीढ़ीगत आंदोलन है, जो अब आपके लिए काम नहीं कर रही हैं। अनुराग ने कहा कि राजस्थान का कोई Gen Z सपना चौधरी के कॉन्सर्ट में जाने के लिए बेताब हो सकता है। तो यह बिल्कुल अलग दुनिया है। मुंबई का कोई Gen Z, जोहरान ममदानी का दीवाना हो सकता है और राजस्थान का कोई Gen Z अशोक गहलोत का। तो, आप जानते हैं, समान आकांक्षाओं को एक साथ कैसे लाया जाए? क्योंकि हर राज्य का अपना अलग वर्ग और जातिगत दृष्टिकोण है। इसलिए Gen Z की कोई एक श्रेणी नहीं है, जो कोई खास क्रांति या बदलाव ला सके। मेरा मतलब है, वे अपने राज्य में ऐसा कर सकते हैं। JLF के आज के PHOTOS


