मिशनरी स्कूलों ने कमजोर विद्यार्थियों से प्रति विषय भरवाया 1000 रुपए का बॉन्ड, रखी शर्त- बोर्ड परीक्षा में पास हो गए तो पैसे वापस

अगले महीने तीन फरवरी से जैक बोर्ड की 10वीं की परीक्षा शुरू हो रही है। बच्चे अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। इधर, सेंटअप परीक्षा में फेल करनेवाले छात्रों की तैयारी बेहतर हो, इसके लिए मिशनरी स्कूल एक पहल के तहत ऐसे बच्चों से 1-1 हजार रुपए का बॉन्ड भरवाया है। कोशिश है कि ऐसे बच्चों पर बेहतर पढ़ाई का दबाव बने, वे इसे एक जिम्मेदारी की तरह लें। उर्सुलाइन कॉन्वेंट स्कूल की 25% छात्राएं मैथ्स में कमजोर है। साइंस और सोशल साइंस में 20-20% कमजोर हैं। ऐसे बच्चों को चिह्नित कर उनके अभिभावक के साथ मीटिंग के बाद प्रति विषय 1-1 हजार रुपए का बॉन्ड भरवाया गया है। कुछ बच्चों ने तो 4-4 विषयों में बॉन्ड भरा है। बॉन्ड भरवाने के साथ शर्त यही रखी गई है कि बोर्ड एग्जाम पास करने के बाद पैसे वापस कर दिए जाएंगे। वहीं संत जॉन्स स्कूल ने कमजोर बच्चों से 1-1 हजार रुपए बॉन्ड के तौर पर लिया है। बॉन्ड की शर्त यही है कि पास करने पर ये पैसे उन्हें वापस कर दिए जाएंगे। संत अलोइस स्कूल में भी इस तरह की पहल की गई है। ऐसे बच्चों के लिए स्कूल प्रबंधन मैथ्स, इंग्लिश और साइंस की एक्स्ट्रा यानि रिमेडियल क्लासेस चलाए जा रहे हैं। वहीं, संत अन्ना स्कूल में कोई बॉन्ड नहीं भरवाया गया है, लेकिन इस संबंध में स्कूल ने अभिभावकों से लिखित आवेदन लिया है। ताकि बच्चे रिजल्ट बेहतर करें। क्या कहते हैं प्राचार्य…इधर, स्कूलों के लिए मैथ्स और साइंस के अलावा सोशल साइंस विषय भी चिंता का विषय बना हुआ है। बच्चे सोशल साइंस में स्कोर नहीं कर पा रहे हैं। बच्चे जहां मैथ्स और साइंस में 100 में 100 अंक ला रहे हैं। वहीं, सोशल साइंस में 90 अंक से बढ़ नहीं पा रहे हैं। ये स्थिति 80 प्रतिशत बच्चों के साथ है। इस कारण रिजल्ट खराब हो रहा है। टीचर्स का कहना है कि बच्चे मैथ्स और साइंस को ज्यादा महत्व देते हैं। सोशल साइंस को उतना समय नहीं देते हैं। इसके अलावा सोशल साइंस में एक साथ 4 विषय हिस्ट्री, जियोग्राफी, इकोनॉमिक्स, सिविक्स पढ़ना पड़ता है। प्रैक्टिकल नहीं है, थ्योरी पेपर है। शिक्षकोंे का कहना है कि बेहतर रिजल्ट के लिए सभी विषयों में बेहतर स्कोर जरूरी है।

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