झारखंड हाईकोर्ट में सोमवार को वन संरक्षित क्षेत्र के आसपास खनन पर रोक लगाने की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस एसएन प्रसाद की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिया है कि वह संरक्षित वन की सीमा से एक किलोमीटर के दायरे में पत्थर खदानों और क्रशर के लिए कोई नई अनुमति नहीं दें। अदालत ने कहा- यदि ऐसी कोई सहमति पहले ही दे दी गई है तो प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड को तत्काल इसका सर्वे करें। अदालत ने पहले दी गई अनुमतियों की सूची कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया, ताकि कोर्ट आगे के आदेश पर विचार कर सके। प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड को एक किलोमीटर के बफर जोन में अवैध खनन या क्रशर संचालन पर लगातार नजर रखने का भी निर्देश दिया गया है। मामले में अगली सुनवाई 17 मार्च को होगी। पूर्व वन अधिकारी आनंद कुमार ने दाखिल की है याचिका मालूम हो कि पूर्व वन अधिकारी आनंद कुमार ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की है। सुनवाई के दौरान बताया गया कि दिसंबर 2015 को अधिसूचना जारी कर संरक्षित वन के आसपास पत्थर खदान और क्रशर लगाने की न्यूनतम दूरी को 500 मीटर से घटाकर 250 मीटर कर दिया गया है। बोर्ड बताया कि 18 अक्टूबर 2017 की अधिसूचना में संरक्षित या आरक्षित वन से न्यूनतम दूरी 250 मीटर ही निर्धारित है। अदालत ने पाया कि प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड का यह नियम सुप्रीम कोर्ट के टीएन गोदावर्मन थिरुमुलपद बनाम भारत सरकार के निर्णय से सीधे टकराता है। इसके बाद अदालत ने संरक्षित वन क्षेत्र के एक किमी के दायरे में क्रशर लगाने आैर खनन का एनआेसी देने पर रोक लगा दी।


