प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने झारखंड लोकसेवा आयोग (जेपीएससी) द्वितीय सिविल सेवा परीक्षा नियुक्ति घोटाले की जांच तेज कर दी है। जांच एजेंसी ने पिछले हफ्ते सीबीआई की एफआईआर व चार्जशीट के आधार पर 60 आरोपियों के खिलाफ ईसीआईआर दर्ज की थी। अब इन सभी आरोपियों के घोटाले के समय के बैंक खाते खंगाले जाएंगे, जब घोटाला उजागर हुआ था। पता लगाया जाएगा कि उस दौरान किन आरोपियों के खाते में बड़ी रकम जमा हुई, वह राशि कहां से आई और उसका उद्देश्य क्या था। बैंक डिटेल्स सामने आने के बाद आरोपियों को समन भेजकर पूछताछ की जाएगी। -शेष पेज 11 पर वह सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है ईडी की जांच में इनका नंबर पहले : जांच में ईडी का सबसे पहले फोकस जेपीएससी के उन तत्कालीन अफसरों पर है, जिन पर अंकों में हेराफेरी, रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने, नियमों का उल्लंघन करने और कॉपियों की जांच के लिए पसंदीदा परीक्षक चुनने का आरोप है। इनमें तत्कालीन अध्यक्ष दिलीप प्रसाद, तत्कालीन सदस्य गोपाल प्रसाद सिंह, शांति देवी, राधा गोविंद, तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक एलिस उषा रानी व असिस्टेंट को-ऑर्डिनेटर इवैल्युएशन के नाम शामिल हैं। आरोपी परीक्षकों की भी सूची तैयार: ईडी ने उन परीक्षकों की सूची भी तैयार की है, जिन पर अभ्यर्थियों को गलत तरीके से नंबर देने का आरोप है। इनमें इंटरव्यू एक्सपर्ट प्रोफेसर नंदलाल, परीक्षक डॉ. मुनींद्र कुमार तिवारी, डॉ. शिव बहादुर सिंह, डॉ. बंशीधर पांडेय, दिवाकर लाल श्रीवास्तव, डॉ. सियाराम सिंह यादव, रघुवीर सिंह तोमर, प्रो. ओंकारनाथ सिंह, प्रदीप कुमार पांडेय, डॉ. मधुसूदन मिश्र, डॉ. सुधीर कुमार शुक्ला, डॉ. सभाजीत सिंह यादव, प्रो अमरनाथ सिंह, डॉ. शशि देवी सिंह, डॉ. दीनानाथ सिंह, डॉ. अशोक कुमार सिंह, डॉ. राजेंद्र प्रसाद सिंह, महेंद्र मोहन वर्मा, डॉ. ओम प्रकाश सिंह, डॉ. योगेंद्र सिंह, डॉ. मिथिलेश कुमार सिंह, डॉ. रवि प्रकाश पांडेय, तुलसी नारायण मुंडा, इंटरव्यू बोर्ड पैनल एक्सपर्ट अलबर्ट टोप्पो व सोहन राम शामिल हैं।


