कोर्ट और अस्पताल से पुलिस को चकमा देकर 4 दिन में चार हवालाती भागे, दो को पकड़ा

एक जैसा पैटर्न, वही सवाल: लगातार हो रही इन घटनाओं ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अदालत परिसर, सिविल अस्पताल और केंद्रीय जेल जैसे स्थानों को सबसे सुरक्षित माना जाता है, लेकिन यहां से आरोपियों का फरार होना सिस्टम की गंभीर कमजोरी को उजागर करता है। खास बात यह है कि सभी मामले एनडीपीएस एक्ट से जुड़े हैं, जिनमें आरोपी पहले से गंभीर मामलों में नामजद हैं। इसके बावजूद हथकड़ी खोलने, निगरानी में ढिलाई और पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था न होने के आरोप सामने आ रहे हैं। 18 जनवरी 2026 को एनडीपीएस एक्ट के तहत गिरफ्तार आरोपी स्टीफन सिद्धू जिला कचहरी में पेशी के दौरान पुलिस हिरासत से फरार हो गया। आरोपी को थाना सलेम टाबरी की पुलिस अदालत में पेश करने लाई थी। सब-इंस्पेक्टर कश्मीर सिंह के अनुसार, अदालत से एक दिन का पुलिस रिमांड मिलने के बाद आरोपी को हथकड़ी लगाकर बाहर लाया जा रहा था। इसी दौरान वकील पार्किंग के पास आरोपी ने हथकड़ी खिसकाई और पुलिसकर्मी को धक्का देकर मौके से फरार हो गया। इस मामले में थाना डिवीजन नंबर 5 पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 262, 221 और 132 के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस की टीमें अलग-अलग इलाकों में छापेमारी कर रही हैं, लेकिन आरोपी की गिरफ्तारी अब तक नहीं हो पाई है। एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस जसकिरणजोत सिंह तेजा के स्तर पर यह बताया गया है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरे घटनाक्रम की जांच की जाएगी। हिरासत से आरोपी के फरार होने की परिस्थितियों, ड्यूटी पर तैनात कर्मियों की भूमिका और तय प्रक्रिया के पालन की समीक्षा की जाएगी। जांच के बाद यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। यदि पुलिस हिरासत से कोई आरोपी फरार होता है, तो यह सामान्य घटना नहीं मानी जाती। ऐसे मामलों में प्राथमिक तौर पर यह जांच की जाती है कि ड्यूटी में लापरवाही, नियमों का उल्लंघन या जानबूझकर ढील तो नहीं बरती गई। लापरवाही साबित होने पर संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई, निलंबन या चार्जशीट तक हो सकती है। गंभीर मामलों में आपराधिक जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है। इससे पहले 16 और 17 जनवरी को भी मेडिकल के दौरान पुलिस हिरासत से हवालातियों के भागने के मामले सामने आए थे। 17 जनवरी को केंद्रीय जेल लुधियाना के बाहर मेडिकल के दौरान एक हवालाती फरार हुआ था, जिसे बाद में पुलिस ने पकड़ लिया। वहीं 16 जनवरी को सिविल अस्पताल में एक अन्य हवालाती मेडिकल के दौरान भागने की कोशिश करता नजर आया, जिसकी तस्वीर भी सामने आई थी। चार दिनों में चार अलग-अलग घटनाएं, अलग-अलग स्थान, लेकिन तरीका लगभग एक जैसा—मेडिकल या पेशी के दौरान लापरवाही का फायदा उठाकर फरारी। भास्कर न्यूज|लुधियाना लुधियाना में पुलिस हिरासत की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। चार दिनों के भीतर अदालत और अस्पताल जैसे सुरक्षित माने जाने वाले स्थानों से एनडीपीएस के आरोपियों के फरार होने की लगातार घटनाएं सामने आई हैं। कुछ मामलों में आरोपी दोबारा काबू कर लिए गए, लेकिन एक मामला ऐसा भी है जिसमें आरोपी अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर बताया जा रहा है। सोमवार 19 जनवरी को सिविल अस्पताल में उस वक्त हंगामा मच गया जब एनडीपीएस मामले में गिरफ्तार आरोपी सौरव पुलिस कस्टडी से फरार हो गया। आरोपी को थाना टिब्बा की पुलिस मेडिकल के लिए अस्पताल लाई थी। एएसआई इंद्रजीत सिंह के अनुसार, आरोपी की टांग में पहले से चोट थी और मेडिकल प्रक्रिया के दौरान वह अचानक फरार हो गया। पुलिस ने अस्पताल परिसर में सर्च अभियान चलाया और कुछ समय बाद आरोपी को काबू कर लिया। हालांकि प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि आरोपी को अस्पताल के बाहर शराब के ठेके के पास से पकड़ा गया। वहीं आरोपी सौरव ने दावा किया कि वह बाथरूम जाने के लिए निकला था। इस पूरे घटनाक्रम ने अस्पतालों में पुलिस कस्टडी की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

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